CWG 2026: 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में शानदार प्रदर्शन कर भारत का गौरव बढ़ाने वाले गोल्ड मेडलिस्ट अस्मिता डे और हर्ष सिंह सोमवार रात दिल्ली लौटे, जहां इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी सफलता पर खुशी जताई और इसे देश, परिवार, कोच और अपने समर्थकों को समर्पित किया। इस प्रदर्शन के साथ भारतीय जूडो टीम ने दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर नया इतिहास बनाया।
हर्ष सिंह ने देश को समर्पित की जीत
कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की 60 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले हर्ष सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए बेहद गर्व का पल है। उन्होंने बताया कि अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स में भी शानदार प्रदर्शन करना है। हर्ष ने अपनी इस सफलता का श्रेय परिवार, दोस्तों, कोच और पूरे भारत के सहयोग व समर्थन को देते हुए कहा कि सभी के विश्वास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
#WATCH | Delhi | Indian Judoka Harsh Singh receives a grand welcome at the IGI airport after winning Gold Medal in the Judo Men's 60 kg category at 2026 Commonwealth Games in Glasgow. pic.twitter.com/yZH1XpqGnm
— ANI (@ANI) August 3, 2026
अस्मिता डे ने रचा इतिहास
महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता डे ने कनाडा की हेइडी क्वाच को रोमांचक मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह मुकाबला ‘गोल्डन स्कोर’ में तय हुआ, जहां अस्मिता ने शानदार वापसी करते हुए भारत को जूडो में पहला गोल्ड दिलाया। उनकी इस जीत के बाद पोडियम पर हर्ष सिंह (गोल्ड), यामिनी मौर्य (सिल्वर) और उन्नति शर्मा (ब्रॉन्ज) भी शामिल हुए, जिससे भारत के जूडो पदकों की संख्या चार हो गई।
#WATCH दिल्ली: जुडो स्वर्ण पदक विजेता अस्मिता डे ने कहा, "बहुत अच्छा लग रहा है कि जुडो में भारत ने पहली बार 2 गोल्ड, 1 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज़ मेडल जीता है। मैं चाहती हूं कि बच्चे इसमें और खेलें और हिस्सा लें।" https://t.co/Eknxb6cwJ1 pic.twitter.com/joXZ1Es7I0
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 3, 2026
भारत में जूडो को मिलेगी नई पहचान
दिल्ली पहुंचने पर अस्मिता डे ने भारतीय जूडो टीम की शानदार सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘बहुत अच्छा लग रहा है। यह पहली बार है जब भारत ने जूडो में दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता है, यह बहुत बड़ी बात है। अब भारत में लोग जूडो को अच्छी तरह पहचानेंगे। और मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे इसमें हिस्सा लें और खेलें।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि यह उपलब्धि देश के युवाओं को जूडो अपनाने के लिए प्रेरित करेगी और इस खेल को नई पहचान दिलाएगी।
‘गोल्ड ही जीतना है’ की सोच बनी जीत की ताकत
फाइनल मुकाबले में शुरुआती दौर में 1-0 से पिछड़ने के बावजूद अस्मिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने बताया कि पूरे मुकाबले के दौरान उनका ध्यान केवल स्वर्ण पदक जीतने पर था। उन्होंने कहा, ‘मैंने ठान लिया था कि मुझे सिर्फ गोल्ड ही जीतना है, इसलिए मुझे जीतना ही था।’ इसी अटूट आत्मविश्वास ने उन्हें मुकाबले में शानदार वापसी दिलाई और भारत के लिए स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया।
भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
ग्लासगो में आयोजित 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स भारतीय जूडो के लिए यादगार साबित हुए। पहली बार भारतीय जूडो टीम ने दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर नया इतिहास रचा। खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने न केवल देश का सम्मान बढ़ाया, बल्कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा की नई मिसाल पेश की है।
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