अंबाला शहर के रहने वाले राहुल धाकड़ ने कड़े परिश्रम और कभी न हार मानने के जज्बे से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने का मुकाम हासिल कर लिया है। लगातार 6 असफलताओं का सामना करने के बावजूद राहुल ने अपने सपने को टूटने नहीं दिया। उन्होंने हर असफलता से सीख लेते हुए अपनी कमियों को दूर किया और आखिरकार सातवें प्रयास में एसएसबी (SSB) की परीक्षा पास कर अपना सपना साकार किया।
चेन्नई में ट्रेनिंग पूरी कर लौटे घर
दिल्ली से बी.कॉम (B.Com) की पढ़ाई के दौरान ही राहुल ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। अधिकारियों के चयन प्रक्रिया को उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने चेन्नई स्थित सैन्य अकादमी में एक साल की कठिन ट्रेनिंग पूरी की। ट्रेनिंग के बाद जब वह पहली बार आधिकारिक तौर पर लेफ्टिनेंट बनकर अपने गृहनगर अंबाला पहुंचे, तो पूरा मोहल्ला ढोल-नगाड़ों और बधाइयों के साथ झूम उठा। एक साल बाद परिवार और पड़ोसियों के बीच पहुंचे राहुल के स्वागत के दौरान माहौल बेहद भावुक और खुशी से भरा रहा।
बचपन से ही था देश सेवा का जुनून
राहुल ने बताया कि भारतीय सेना में शामिल होकर देश रक्षा करने का विचार उनके मन में बचपन से ही था। असफलताओं के दौर में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी तैयारी को और अधिक मजबूत बनाते रहे। उन्होंने कहा कि एक साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद जब उन्होंने अपने परिजनों और कॉलोनीवासियों के चेहरे पर खुशी देखी, तो उन्हें असीम सुकून महसूस हुआ।
पिता ने बताया प्रेरणादायी सफर
राहुल के पिता पंकज, जो पहले नौकरी करते थे और अब अपना एक छोटा व्यवसाय चलाते हैं, अपने बेटे की इस ऐतिहासिक सफलता पर बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राहुल जब दसवीं कक्षा में था, तभी से उसने सेना में जाकर देश की सेवा करने की इच्छा जाहिर कर दी थी। पिता ने कहा कि राहुल का यह सफर हर उस युवा के लिए एक प्रेरणा है जो कठिनाइयों के आगे घुटने टेक देता है। अगर इरादे पक्के हों, तो हर मुश्किल पार की जा सकती है।
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