BRICS 2026: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शनिवार को दिल्ली पहुंच गए। दिन में करीब 12 बजे उनका विमान पालम एयरपोर्ट पर उतरा, जहां केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। करीब सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आज शाम 5:45 बजे द्विपक्षीय बैठक होनी है।
क्या है दौरे की खासियत?
उनका भारत आना अहम माना जा रहा है, जब दोनों देश पिछले कुछ समय से अपने रिश्तों में सुधार और स्थिरता लाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत लगातार कहता रहा है कि द्विपक्षीय संबंधों की निरंतर प्रगति के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता जरूरी है।
क्या है तीन अहम मुद्दे?
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता, भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और BRICS के भीतर सहयोग मजबूत करने जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। दोनों नेता आपसी मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने और संवाद बढ़ाने पर भी चर्चा कर सकते हैं।
BRICS सम्मेलन
12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। भारत मौजूदा BRICS अध्यक्ष के तौर पर इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने BRICS को उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के बीच एकजुटता एवं सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बताया है।
तीसरी बड़ी मुलाकात
माओ निंग के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की यह कजान और तियानजिन में हुई मुलाकातों के बाद लगातार तीसरी अहम बैठक है। यह लगातार तीसरा साल भी है, जब दोनों नेताओं की मुलाकात हो रही है। चीन ने कहा है कि वह दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन के अनुरूप भारत के साथ काम करना चाहता है।
चीन का क्या है रुख?
चीन दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखने, संवाद बढ़ाने और सहयोग मजबूत करने पर जोर दे रहा है। साथ ही मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने और दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी, मित्र तथा एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करने वाले साझेदार के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
सात साल बाद वापसी
शी जिनपिंग इससे पहले 2019 में चेन्नई के निकट मामल्लपुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए भारत आए थे। इसके अलावा वह 2016 में गोवा में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में भी शामिल हुए थे। राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी पहली भारत यात्रा सितंबर 2014 में हुई थी, जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ विस्तृत बातचीत की थी।
दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कड़ी
हाल ही में बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संक्षिप्त बातचीत हुई थी। ऐसे में दिल्ली में होने वाली द्विपक्षीय बैठक को दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कड़ी माना जा रहा है।
क्यों अहम है दौरा?
शी जिनपिंग की भारत यात्रा एक ओर BRICS सहयोग को मजबूत करने के लिहाज से अहम है, वहीं दूसरी ओर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में जारी सुधार प्रक्रिया को भी नई दिशा दे सकती है। अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों नेताओं की बातचीत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी।
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