उत्तर प्रदेश के रामपुर की रहने वाली 10वीं कक्षा की दो जुड़वां छात्राओं(Rampur Twin Sisters) को आधार कार्ड बनवाने में अनोखी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिला मजिस्ट्रेट अजय द्विवेदी के मुताबिक, खिजरा जुबैर और तुबा जुबैर आइडेंटिकल ट्विंस हैं। दोनों का आधार कार्ड बचपन में करीब चार साल की उम्र में उनके माता-पिता के पहचान दस्तावेजों के आधार पर बनाया गया था। दसवीं कक्षा में पहुंचने के बाद दोनों छात्राओं के आधार से जुड़ी जानकारी को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
इसी दौरान जब एक छात्रा के फिंगरप्रिंट और रेटिना की जानकारी दर्ज की गई और दूसरी छात्रा का आधार तैयार करने की प्रक्रिया हुई तो दोनों की बायोमेट्रिक जानकारी सिस्टम में मैच हो गई। इस वजह से दूसरी छात्रा का आधार रिकॉर्ड डुप्लीकेसी में चला गया और दोनों के लिए अलग-अलग आधार कार्ड बनवाने में परेशानी आने लगी। मामला करीब चार महीने पहले जिला प्रशासन के सामने पहुंचा था।
प्रशासन और UIDAI ने मिलकर निकाला समाधान
समस्या सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया। अधिकारियों के बीच समन्वय के बाद दोनों छात्राओं के लिए अलग-अलग आधार कार्ड जारी करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
#WATCH रामपुर, उत्तर प्रदेश: 10वीं कक्षा की जुड़वां छात्राओं का रेटिना डेटा मैच होने के बाद आधार से जुड़ी समस्या पर ज़िला मजिस्ट्रेट अजय द्विवेदी ने कहा, “दो छात्रा हैं खिजरा जुबैर और तुबा जुबैर, ये रामपुर शहर की रहने वाली हैं। यह दोनों बच्चियां आइडेंटिकल ट्विंस हैं। पूर्व में 4 साल की उम्र में इनका आधार कार्ड बना था जो कि माता-पिता के पहचान पत्र के आधार पर बना था। दसवीं कक्षा में आने पर जब नया आधार कार्ड बनना था तो एक बच्ची के फिंगरप्रिंट और रेटिना लेने के बाद जब दूसरी बच्ची का आधार कार्ड बनाया गया तो वह एकदम मैच कर गया और डुप्लीकेसी में चला गया। इस वजह से उन दोनों का अलग-अलग आधार कार्ड नहीं बन पा रहा था। यह प्रकरण हमारे पास लगभग 4 महीने पहले आया था। जिला प्रशासन ने UIDAI के वरिष्ठ अधिकारियों से दिल्ली में बात कर कोऑर्डिनेट किया जिसके माध्यम से दोनों बच्चियों का अलग-अलग आधार कार्ड बन गया है। अब इनकी पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं है।”(23.09)
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 23, 2026
अब पढ़ाई में नहीं आएगी परेशानी
जिला प्रशासन के अनुसार, दोनों छात्राओं के अलग-अलग आधार कार्ड बन चुके हैं। इससे अब उनकी पढ़ाई और इससे जुड़ी जरूरी प्रक्रियाओं में आधार को लेकर किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।



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