कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) में एक बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगने के आरोप में SFIO के चेन्नई कार्यालय में तैनात डिप्टी डायरेक्टर हरीश कुमार तंवर और दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अधिकारी 2017 बैच का इनकम टैक्स कैडर का IRS अधिकारी है। इस सनसनीखेज कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
DHFL घोटाले की जांच में राहत देने के नाम पर मांगी गई थी घूस
CBI के अनुसार, इस मामले में शिकायतकर्ता गोपाल शिवराम दलवी ने 12 अक्टूबर 2026 को लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि आरोपी अधिकारी हरीश कुमार तंवर, दिल्ली के वकील भारत शर्मा और उनके रिश्तेदार आर्यन शर्मा ने डीएचएफएल (DHFL) घोटाले से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की जांच के दौरान शिकायतकर्ता को गिरफ्तारी और अभियोजन की कार्रवाई का डर दिखाया। इसी मामले में कानूनी राहत और क्लोजर दिलाने के एवज में कुल 1 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी।
जाल बिछाकर पहली किस्त के रूप में ₹20 लाख नकद बरामद
शिकायत मिलने के बाद CBI ने स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में 12 और 13 अक्टूबर को आरोपों का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की बात पुख्ता हो गई। जांच में सामने आया कि वकील भारत शर्मा ने कुल 1 करोड़ की रिश्वत में से 20 लाख रुपये अपने पास रखने और बाकी रकम डिप्टी डायरेक्टर तक पहुंचाने की बात कही थी। इसके बाद CBI ने एक सटीक जाल बिछाकर 13 अक्टूबर को 20 लाख रुपये की पहली किस्त लेते समय वकील भारत शर्मा को धर दबोचा। इसी कार्रवाई के दौरान SFIO डिप्टी डायरेक्टर हरीश कुमार तंवर और आर्यन शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
अन्य वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस पूरे भ्रष्टाचार प्रकरण में SFIO के एक अन्य वरिष्ठ IRS अधिकारी की संलिप्तता भी CBI की रडार पर आ गई है। सूत्रों के मुताबिक, यह वरिष्ठ अधिकारी संबंधित डिप्टी डायरेक्टर के कामकाज की निगरानी कर रहे थे। हालांकि उनकी अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन उनसे पूछताछ की जा रही है और उन्हें उनके मूल कैडर में वापस भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। CBI ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी कर कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सामग्रियां भी बरामद की हैं।
BNS और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज
CBI ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 व 7A के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच नई दिल्ली स्थित CBI की एंटी करप्शन यूनिट-3 के इंस्पेक्टर शक्ति कुमार को सौंपी गई है। उल्लेखनीय है कि दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) और इसके प्रमोटर कपिल वधावन तथा धीरज वधावन पर 34,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम के अवैध डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच लंबे समय से विभिन्न केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं।
READ MORE: अतीक के गढ़ का नामो-निशान मिटा, अब ‘कसारी-मसारी’ बनेगा ‘कृष्णपुरी’! CM योगी का प्रयागराज में बड़ा ऐलान