ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले 10 दिनों के भीतर रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंधों और 100% टैरिफ लगाने को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं। इस फैसले का सीधा असर भारत समेत उन तमाम देशों पर पड़ सकता है जो रूस से ऊर्जा संसाधनों का आयात कर रहे हैं। राजदूत गोर ने स्पष्ट किया कि 18 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ (SRIA) को मंजूरी दी थी। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार मिलता है कि वे प्रतिबंधों के तहत फैसला लें, हालांकि कानून पारित होने के 30 दिनों की समयसीमा में अभी तक किसी देश पर बैन नहीं लगाया गया है।
तीन श्रेणियों में बांटे गए प्रतिबंध के नियम
अमेरिकी राजदूत के अनुसार, यह कानून किसी विशेष देश को निशाना बनाकर तैयार नहीं किया गया है। राष्ट्रपति को उन देशों पर कार्रवाई करने का अधिकार है जो रूस से कच्चा तेल खरीदते हैं, प्राकृतिक गैस खरीदते हैं या प्रतिबंधों से बचने में रूस की किसी प्रकार से मदद करते हैं। इन तीन अलग-अलग श्रेणियों में भारत के साथ-साथ कई अन्य देश भी आते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत को इस मामले में कोई विशेष राहत या छूट मिलेगी, तो गोर ने कहा कि अंतिम निर्णय पूरी तरह से राष्ट्रपति ट्रंप के पाले में है और वही इस पर रुख साफ करेंगे।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर प्रगति और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
प्रतिबंधों की आशंकाओं के बीच सर्जियो गोर ने यह भी आश्वस्त किया कि भारत और अमेरिका बहुत जल्द एक व्यापक व्यापार समझौते पर पहुंचने वाले हैं। लगभग डेढ़ साल से चल रही इस जटिल बातचीत में दोनों पक्षों ने काफी प्रगति की है और अधिकांश मुख्य मुद्दों को सुलझा लिया गया है। अब केवल कुछ छोटी-मोटी बातें और नई चिंताएं ही बची हैं। गोर ने बताया कि हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमी पावर एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ गैरकानूनी थे। इस अदालती फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने व्यापार समझौते के कुछ पहलुओं पर पुनर्विकार किया है।
रक्षा, चिप निर्माण और तकनीक में सहयोग बढ़ाने को उत्सुक अमेरिका
ट्रंप प्रशासन भारत के साथ रक्षा, आईटी, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर चिप निर्माण जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने के लिए काफी उत्सुक है। अमेरिकी राजदूत ने विश्वास जताया कि भारतीय बाजार में अमेरिकी कंपनियों द्वारा किया जाने वाला निवेश न केवल भारत के विकास में योगदान देगा, बल्कि खुद अमेरिका के भीतर भी रोजगार के नए अवसर पैदा करने में काफी मददगार साबित होगा।
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