HomeBreaking Newsकर्ज के दलदल में पाकिस्तान, 18.77 लाख करोड़ के बजट में 11...

कर्ज के दलदल में पाकिस्तान, 18.77 लाख करोड़ के बजट में 11 लाख करोड़ सिर्फ कर्ज का ब्याज!

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था एक बार फिर गहरी खाई में धकेलती नजर आ रही है। हाल ही में पेश किए गए वित्त वर्ष 2026-27 के 18.77 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये के बजट ने देश की खोखली होती वित्तीय व्यवस्था की पोल खोल दी है। आईएमएफ के कड़े प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव के बीच आए इस बजट में विकास कार्यों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। देश की कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा केवल कर्ज के कुएं को भरने और गोला-बारूद जुटाने में उड़ रहा है।

ब्याज और रक्षा पर देश का खजाना खाली

आंकड़ों पर गौर करें तो पाकिस्तान की माली हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। कुल बजट का बहुत बड़ा हिस्सा बिना किसी उत्पादक कार्य के सीधे उधारी चुकाने में जा रहा है। स्थिति यह है कि 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की भारी रकम सिर्फ पिछले कर्जों का ब्याज चुकाने में खर्च हो रही है। इसके अलावा, देश की सुरक्षा और सैन्य साजो-सामान के नाम पर 3 लाख करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष प्रावधान किया गया है, जिसमें 82.2 हजार करोड़ की पेंशन जोड़ लें तो यह आंकड़ा 3.82 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।

एक तिहाई हिस्सा सिर्फ हथियारों की भेंट

पाकिस्तान के पास खाने के लिए भले ही बुनियादी संसाधन लड़खड़ा रहे हों, लेकिन हथियारों के अंबार के लिए तिजोरी हमेशा खुली रहती है। राज्यों की हिस्सेदारी को अलग करने के बाद केंद्र सरकार के पास जो 11.75 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध बजट बचता है, उसका लगभग 32.71% हिस्सा सीधे तौर पर सैन्य ताकत बढ़ाने पर खर्च किया जा रहा है। भारत के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से पड़ोसी देश ने अपनी रक्षा तिजोरी में लगातार रिकॉर्ड दोहरे अंकों की बढ़ोतरी की है, जिससे उसकी प्राथमिकताएं साफ जगजाहिर होती हैं।

विकास के नाम पर सिर्फ ऊंट के मुंह में जीरा

जब देश की कुल कमाई का दो-तिहाई हिस्सा ब्याज और सेना की भेंट चढ़ जाए, तो आम जनता के कल्याण के लिए कुछ नहीं बचता। यही वजह है कि इस बजट में विकास कार्यों को सबसे आखिरी पायदान पर रखा गया है और इसके लिए मात्र 1 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। महंगाई की मार झेल रही आम जनता के कल्याण और आधारभूत संरचना के विकास के लिए पाकिस्तान सरकार के पास फंड की भारी किल्लत साफ तौर पर देखी जा सकती है।

राज्यों के भरोसे बची सरकार की साख

आर्थिक कुप्रबंधन की इंतेहा यह है कि संघीय सरकार के पास अपने नियमित खर्चे चलाने के लिए भी पर्याप्त राजस्व नहीं बचा है। सरकार का शुद्ध राजस्व लगभग 11 लाख करोड़ रुपये है, जो कि ब्याज और रक्षा के कुल खर्च से भी कम है। नतीजतन, केंद्र सरकार को विकास और संचालन के लिए राज्यों के राजस्व पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ रहा है। राजकोषीय घाटा बढ़कर 5.22 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी का 3.6%) हो चुका है, और नए कर्ज लेने की मजबूरी इस दुष्चक्र को और खतरनाक बना रही है।

पीओके और गिलगित के लिए तिजोरी खुली

एक तरफ जहां देश की आम जनता महंगाई और गरीबी के संकट से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार ने अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं के तहत पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए सहायता राशि में इजाफा कर दिया है। सरकार ने पीओके के लिए आवंटन को बढ़ाकर 14.60 हजार करोड़ और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए 8,800 करोड़ रुपये कर दिया है। यह कदम साफ इशारा करता है कि आर्थिक बर्बादी की कगार पर खड़े होने के बावजूद पड़ोसी देश अपनी संकीर्ण राजनीतिक चालों से बाज नहीं आ रहा है।

 

READ MORE: अब बिना डेट की मिठाई बेचना पड़ेगा भारी! यूपी में खुली और पैक्ड मिठाइयों पर एक्सपायरी नियम लागू

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments