हिमाचल प्रदेश के मंडी में हुई जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी ‘दिशा’ की बैठक में सांसद कंगना रनौत(Kangana Ranaut Mandi) ने विकास योजनाओं की धीमी रफ्तार पर अधिकारियों से नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि बैठकें सिर्फ चर्चा या औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पिछली बैठकों में जिन मुद्दों और सुझावों पर सहमति बनी थी उन्हें जमीन पर लागू करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। बैठक में कंगना ने अधिकारियों से पूछा कि पहले उठाए गए मामलों पर अब तक अपेक्षित काम क्यों नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि सिर्फ योजना बनाना या सुझाव देना पर्याप्त नहीं है। किसी भी परियोजना का असली मूल्य तभी है, जब उसका काम आगे बढ़े और लोगों को उसका फायदा मिले। सांसद ने केंद्र से मिले फंड के बावजूद कई परियोजनाओं के लंबित रहने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कुछ काम जमीन से जुड़े विवादों, जबकि कुछ अनुमति और एनओसी की प्रक्रिया के कारण रुके हुए हैं। ऐसे सभी मामलों की पूरी जानकारी तैयार करने के निर्देश दिए गए।
काम की समयसीमा तय करने के निर्देश
कंगना रनौत ने अधिकारियों से कहा कि अलग-अलग स्तर तक पूरे हो चुके कार्यों की सूची तैयार की जाए। 40, 50, 60 और 80 प्रतिशत तक पूर्ण परियोजनाओं को अलग-अलग चिन्हित कर उनके लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी लंबित योजना की स्थिति अस्पष्ट नहीं रहनी चाहिए। हर काम की प्रगति और उससे जुड़ी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर भी सांसद ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि केवल पैसा वापस करने का निर्देश देना पर्याप्त नहीं है। जब तक राशि वास्तव में सरकारी खाते में जमा नहीं होती, तब तक मामला खत्म नहीं माना जाएगा।
कंगना ने अधिकारियों को चेताया कि मंडी संसदीय क्षेत्र के विकास पर नजर है। विभागों की नियमित समीक्षा होगी और लापरवाही मिलने पर रिपोर्ट उच्च स्तर तक भेजी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अब बैठकों में सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि जमीन पर काम नजर आना चाहिए।