भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भारत के साथ अपने देश के संबंधों और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) परियोजना पर बात की। उन्होंने भारत को भूटान का भरोसेमंद दोस्त और साझेदार बताते हुए कहा कि प्रस्तावित शहर की भौगोलिक स्थिति और भारत से मिलने वाला समर्थन इसकी अहम ताकत हैं।
भारत की सीमा से सटी है GMC की लोकेशन
PM त्शेरिंग तोबगे के मुताबिक, गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान की उस सीमा के पास विकसित की जा रही है, जो भारत के असम से लगती है। उन्होंने कहा कि परियोजना की लोकेशन उसे भारत के बड़े बाजार से सीधे जुड़ने का अवसर देती है। भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे ने कहा कि सीमा के दूसरी ओर भारत है, जिसे उन्होंने दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश और बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया। उनके अनुसार, भारत के साथ कनेक्टिविटी GMC को दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर सकती है।
मोदी सरकार और असम के समर्थन का जिक्र
PM त्शेरिंग तोबगे ने कहा कि GMC की परिकल्पना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत सरकार और असम सरकार का समर्थन मिला है। उनके मुताबिक, किसी नए शहर के लिए बड़े बाजारों तक पहुंच, बेहतर कनेक्टिविटी और एक भरोसेमंद पड़ोसी का सहयोग महत्वपूर्ण संसाधन हैं। उन्होंने कहा कि GMC को शुरुआत से ही ऐसे कई फायदे मिल रहे हैं, जिन्हें अन्य नए शहरों को हासिल करने में लंबा समय लग सकता है।
‘भरोसा खरीदा नहीं जा सकता’
भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे ने अपने देश की एक अन्य ताकत के तौर पर ‘भरोसे’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह ऐसी चीज है जिसे खरीदा नहीं जा सकता। उनके मुताबिक, भूटान में शांति, राजनीतिक स्थिरता, कानून का शासन और प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का रिकॉर्ड इस भरोसे की नींव है।टोबगे ने कहा कि लंबे समय के निवेशकों के लिए स्थिरता और भरोसा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे उन्हें भविष्य को लेकर निश्चितता मिलती है।
दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के लिए संभावित गेटवे
टोबगे ने GMC को सिर्फ भूटान की एक शहरी परियोजना के रूप में पेश करने के बजाय इसे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से भी जोड़ा। उनके मुताबिक, भारत के साथ भौगोलिक निकटता और बाजारों तक पहुंच के कारण यह शहर दक्षिण एशिया तथा दक्षिण पूर्व एशिया के बीच एक संभावित गेटवे की भूमिका निभा सकता है। अपने संबोधन में उन्होंने GMC की क्षमता को रेखांकित करते हुए भारत के साथ संबंधों, सीमा से जुड़ी भौगोलिक स्थिति और दोनों देशों के बीच भरोसे को परियोजना के महत्वपूर्ण आधारों के तौर पर सामने रखा।
Read More

