उत्तराखंड के गायक अभिनव सिंह चौहान का नया रोमांटिक गाना ‘पहली दफा’ रिलीज होते ही इंटरनेट पर छा गया है, जिसे श्रोताओं की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। 1 अगस्त 2026 को जारी इस गीत में अभिनव और रुम्मन अहमद की केमिस्ट्री के साथ-साथ सुरीले संगीत को भी काफी सराहा जा रहा है। इस गाने का पूरा वीडियो यूट्यूब पर उपलब्ध है।
गायकी और अभिनय के दम पर युवाओं के दिलों पर राज कर रहे अभिनव चौहान
अभिनव सिंह चौहान शानदार गायकी के साथ-साथ इस गाने के वीडियो में बेहतरीन अभिनय कर अभिनव ने साबित कर दिया है कि वे उत्तराखंड के एक बेहतरीन गायक होने के साथ-साथ बेहद प्रतिभावान अभिनेता भी हैं। नरेंद्र सिंह नेगी, किशन महिपाल और प्रियंका मेहर जैसे दिग्गजों के नक्शेकदम पर चलते हुए अभिनव उत्तराखंड की लोक संस्कृति को एक नई और आधुनिक पहचान दिला रहे हैं।
पहाड़ी संगीत को मिला नया मुकाम
उत्तराखंड में ही पले-बढ़े अभिनव ने बिना किसी बड़े औपचारिक प्रशिक्षण के केवल थिएटर के अनुभव और वरिष्ठ कलाकारों को देखकर अपनी अभिनय कला को निखारा है। अपनी माटी से गहरे जुड़ाव के कारण ही वे बड़े पर्दे पर पहाड़ी जीवन के किरदारों को इतनी जीवंतता से निभा पाते हैं। अभिनेता का मानना है कि उत्तराखंड की क्षेत्रीय भाषाओं में काम करना उनके लिए गर्व की बात है।
पलायन के दर्द और जौनसारी संस्कृति को समेटे है ‘मेरे गांव की बाट’
सुपरहिट फिल्म ‘मेरे गांव की बाट’ (यानी मेरे गांव का रास्ता) की सफलता के पीछे इसकी दमदार कहानी और दिल को छू लेने वाला संगीत है। फिल्म के निर्देशक अनुज जोशी, जो इससे पहले ‘तेरी सौ’ और ‘असगार’ जैसी कल्ट फिल्में दे चुके हैं, ने इस बार जौनसार-बावर की समृद्ध संस्कृति को बड़े पर्दे पर उतारने का साहसिक फैसला लिया। इस फिल्म के माध्यम से उन्होंने पहाड़ों से हो रहे पलायन के गंभीर मुद्दे को उठाया है। फिल्म समाज को संदेश देती है कि तरक्की की दौड़ में हमें अपने गांव की पगडंडियों और अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलना चाहिए। इस संदेश को दर्शकों तक पहुंचाने में फिल्म के बेहद लोकप्रिय टाइटल ट्रैक “ओ मेरे गांव की बाटा, तुळसी की झाड़ी… लौट के आ जा रे भाई, अपणी पहाड़ी…”ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है, जिसे खुद अभिनव ने अपनी आवाज से सजाया है।
उत्तराखंडी सिनेमा का सुनहरा दौर और अमित वी कपूर के सुरों का जादू
इस ऐतिहासिक सफलता में मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर अमित वी कपूर के जादुई संगीत का बहुत बड़ा योगदान है। अमित कपूर ने उत्तराखंडी लोक संगीत की पारंपरिक मिठास, जैसे ढोल-दमाऊ, हुड़का और बांसुरी की प्रामाणिक आवाजों को आधुनिकता के साथ इस तरह पिरोया है कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए हैं। हिंदी गानों में भी हाथ आजमा चुके अमित और निर्देशक अनुज जोशी का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के आने से अब उत्तराखंडी सिनेमा का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। यदि क्षेत्रीय सिनेमाघरों और सरकारी सब्सिडी का सहयोग इसी तरह मिलता रहा, तो उत्तराखंड की फिल्म इंडस्ट्री बहुत जल्द देश की बड़ी फिल्म इंडस्ट्रीज को टक्कर देती नजर आएगी।
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