भारत सरकार 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान में मौजूद आतंकी नेता हाफ़िज़ सईद के लिए राजनयिक चैनलों के ज़रिए इस्लामाबाद को कोर्ट का समन भेजेगी। कानूनी कार्यवाही के लिहाज़ से यह कदम अहम है क्योंकि भारत यह रिकॉर्ड पर लाना चाहता है कि आरोपी को कोर्ट के सामने पेश होने और अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया था।
अगले कदमों में उसे ‘अपराधी’ घोषित करना शामिल होगा। भारतीय कानून, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ की धारा 356 के तहत, PO की गैर-मौजूदगी में भी जांच, ट्रायल या फैसला सुनाने की इजाज़त देता है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर के टूरिस्ट स्पॉट पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 27 लोगों की मौत हुई थी, से जुड़ी साज़िश के मामले में हाफ़िज़ सईद को आरोपी बनाया है। जम्मू की एक स्पेशल NIA कोर्ट इस मामले में उसके खिलाफ़ पहले ही गैर-ज़मानती वारंट जारी कर चुकी है।
विदेश मंत्रालय का कदम
भारत और पाकिस्तान के बीच प्रत्यर्पण की कोई व्यवस्था नहीं है। भारत पहले ही लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक हाफ़िज़ सईद को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत ग्लोबल और व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित कर चुका है, जैसा कि अमेरिका ने कई साल पहले किया था। उसके खिलाफ़ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है।
पाकिस्तान का दावा है कि लाहौर का रहने वाला 76 वर्षीय सईद टेरर-फाइनेंसिंग के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद हिरासत में है। लेकिन भारतीय एजेंसियों का लंबे समय से आरोप है कि पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र के भीतर कुछ लोग सईद जैसे आतंकवादियों को अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई से बचाने की कोशिश करते रहे हैं, वे ऐसा यह दिखाकर करते हैं कि उन्होंने उनके खिलाफ़ कार्रवाई की है।
सईद के लिए समन भारत के विदेश मंत्रालय के ज़रिए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को भेजा जाएगा। NIA ने लश्कर-ए-तैयबा और एक अन्य आतंकी समूह ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के नेता के तौर पर उसकी भूमिका को रेखांकित किया है। सूत्रों ने बताया कि गैर-ज़मानती वारंट के बाद, अब पाकिस्तान में कोर्ट द्वारा जारी समन को आधिकारिक तौर पर तामील कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
मुंबई मामले में भी कार्रवाई
इस बीच मुंबई पुलिस ने इंटरपोल के ज़रिए छह फरार आरोपियों के खिलाफ़ कोर्ट के ‘प्रोक्लेमेशन ऑर्डर’ की तामील कराने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया है। इन आरोपियों में LeT के संस्थापक हाफ़िज़ सईद और ज़की-उर-रहमान लखवी भी शामिल हैं। इस कदम से 2008 के 26/11 आतंकी हमलों में उनकी भूमिका के लिए उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने का रास्ता साफ़ हो गया है। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर उज्ज्वल निकम ने शुक्रवार को पुलिस की ओर से एक अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। यह रिपोर्ट इस साल जुलाई में फरार आरोपियों के खिलाफ़ जारी ‘प्रोक्लेमेशन ऑर्डर’ और उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू करने के संबंध में थी।
न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक, निकम ने आतंकी मामलों की सुनवाई कर रही स्पेशल कोर्ट को बताया, “हमने पाकिस्तान में रह रहे आरोपियों के खिलाफ़ इंटरपोल के ज़रिए ‘प्रोक्लेमेशन ऑर्डर’ की तामील कराने के लिए ज़रूरी कदम उठाने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) को लिखा है।” उन्होंने कहा, “3 अगस्त को गृह मंत्रालय ने हमारी रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लिया था और इस मामले की स्थिति बताने के लिए समय मांगा था।”
26/11 हमलों के मामले की सुनवाई कर रही कोर्ट ने सईद, लखवी और अन्य फरार आरोपियों साजिद मीर, अबू अलकामा, आसिम उर्फ़ अबू कहफ़ा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा के खिलाफ़ ‘प्रोक्लेमेशन ऑर्डर’ जारी किए थे। ये सभी पाकिस्तानी नागरिक हैं।
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