रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह(Rajnath Singh) ने कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल और तेजी से बढ़ रही तकनीकी चुनौतियों के दौर में रक्षा मंत्रालय के सैन्य और सिविल तंत्र के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि दोनों का साझा उद्देश्य देश की सुरक्षा को मजबूत करना है और “राष्ट्र सर्वोपरि” की भावना के साथ मिलकर काम करना है। नई दिल्ली में आयोजित 85वें AFHQ सिविलियन सर्विसेज डे कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।
राजनाथ सिंह ने कहा कि AFHQ सिविलियन सर्विसेज को केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने इस कैडर से रक्षा प्रबंधन में रणनीतिक सोच विकसित करने, शोध को बढ़ावा देने और नए विचारों के साथ काम करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि आधुनिक रक्षा व्यवस्था में सिविल अधिकारियों की भूमिका लगातार अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
क्या है AFHQ Day?
AFHQ Day हर वर्ष 1 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य उन सिविलियन कर्मचारियों के योगदान को सम्मान देना है, जो सशस्त्र सेनाओं के साथ मिलकर रक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली को सुचारु रूप से संचालित करते हैं। AFHQ कैडर की स्थापना 1 अगस्त 1942 को हुई थी। वर्तमान में इस कैडर के कर्मचारी तीनों सेनाओं के इंटीग्रेटेड सर्विस मुख्यालय, हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ तथा रक्षा मंत्रालय के 24 इंटर-सर्विस संगठनों में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रहे हैं।
अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी
राजनाथ सिंह ने बताया कि सैन्य अधिकारी युद्ध संचालन, कमांड और वास्तविक परिस्थितियों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव रखते हैं। दूसरी ओर, सिविल अधिकारी प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी नीतियों, नियमों और संस्थागत प्रक्रियाओं की गहरी समझ रखते हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों की क्षमताओं को साथ लाकर रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है।
इसी उद्देश्य से उन्होंने सैन्य और सिविल अधिकारियों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम (ज्वाइंट ट्रेनिंग) और डेवलपमेंटल असाइनमेंट को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि दोनों एक-दूसरे की कार्यशैली और जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान
रक्षा मंत्री ने आधुनिक दौर में साइबर वॉरफेयर की बढ़ती चुनौती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि AFHQ सिविलियन सर्विसेज के अधिकारी अपनी तकनीकी और प्रशासनिक विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए रक्षा क्षेत्र के लिए साझा साइबर टूल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अलावा उन्होंने भारतीय सैन्य इतिहास के अध्ययन के लिए एक अलग मंच बनाने का सुझाव दिया। उनका मानना है कि यदि सैन्य इतिहास को सिविलियन दृष्टिकोण से भी समझा जाए तो रक्षा नीति और रणनीति के क्षेत्र में नए विचार सामने आ सकते हैं।
डिजिटल पहल की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने ज्वाइंट सेक्रेटरी एवं चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर (JS & CAO) कार्यालय की कई नई डिजिटल पहलों का शुभारंभ किया। इनमें इंटरनेट बेस्ड अकोमोडेशन मैनेजमेंट सिस्टम (IBAMS), TULIP 2.0 के साथ eHRMS और पे-एंड-अलाउंस प्रोसेसिंग का एकीकरण तथा SPARROW पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा ‘संवाद’ मैगजीन के 34वें अंक का विमोचन भी किया गया।
इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले AFHQ कर्मचारियों और उनके बच्चों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।