Pitra Paksha 2026: इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर, रविवार से हो रही है। पितृ पक्ष की 15 तिथियों में पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान और पंचबलि कर्म जैसे धार्मिक कार्य किए जाते हैं। मान्यता के अनुसार परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु जिस तिथि को हुई हो, उसी तिथि पर पितृ पक्ष में उसका श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। लेकिन कई बार लोगों को मृत्यु की अंग्रेजी तारीख तो पता होती है, जबकि उस दिन हिंदू पंचांग की कौन-सी तिथि थी, इसकी जानकारी नहीं होती।
पंचांग से ऐसे पता करें मृत्यु की तिथि
मृत्यु की तिथि जानने के लिए पंचांग की मदद ली जा सकती है। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए किसी व्यक्ति के दादा का निधन 1 अगस्त 1998 को हुआ था। उस समय वह व्यक्ति बहुत छोटा था, इसलिए उसे अपने दादा की मृत्यु की हिंदू तिथि मालूम नहीं है। ऐसी स्थिति में 100 साल वाला पंचांग बाजार से लिया जा सकता है या ऑनलाइन पंचांग की मदद ली जा सकती है।
पंचांग में दर्ज करें मृत्यु की तारीख
ऑनलाइन पंचांग खोलने के बाद उसके कैलेंडर में 1 अगस्त 1998 की तारीख देखनी होगी। उस तारीख को चुनने पर उस दिन की तिथि और ग्रह-नक्षत्र से जुड़ी जानकारी सामने आ जाएगी। 1 अगस्त 1998 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी। अष्टमी तिथि सुबह 06:42 बजे तक थी, जबकि उस दिन सूर्योदय सुबह 05:42 बजे हो चुका था। इसलिए उदयातिथि के आधार पर 1 अगस्त को पूरे दिन अष्टमी तिथि ही मानी जाएगी, नवमी नहीं।
सूर्योदय से तय होती है तिथि
इस तरह उस व्यक्ति को पता चल जाएगा कि उसके दादा की मृत्यु अष्टमी तिथि को हुई थी। दरअसल, अंग्रेजी कैलेंडर में रात 12 बजे के बाद तारीख बदल जाती है, क्योंकि एक दिन 24 घंटे का होता है। इसके विपरीत पंचांग की तिथि हमेशा 24 घंटे की नहीं होती। कोई तिथि 24 घंटे से कम या उससे अधिक समय तक भी रह सकती है। इसी वजह से हिंदू पंचांग में तिथि की गणना सूर्योदय को ध्यान में रखकर की जाती है। सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही होती है, वही उस दिन की मान्य तिथि मानी जाती है।
अष्टमी तिथि पर होगा श्राद्ध
अब जब उस व्यक्ति को पता चल गया कि उसके दादा की मृत्यु अष्टमी तिथि को हुई थी, तो पितृ पक्ष में वह अष्टमी श्राद्ध के दिन उनके लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान आदि कर सकता है। अष्टमी श्राद्ध पितृ पक्ष में आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है।
मृत्यु की तिथि के अनुसार करें श्राद्ध
पितृ पक्ष में प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक कुल 15 तिथियां होती हैं। किसी व्यक्ति की मृत्यु किसी भी महीने के किसी भी पक्ष की किसी भी तिथि को हुई हो, पितृ पक्ष में उसका श्राद्ध, तर्पण और अन्य संबंधित धार्मिक कर्म उसी तिथि पर किए जाते हैं। इसलिए मृत्यु की अंग्रेजी तारीख मालूम होने पर पहले पंचांग से उस दिन की हिंदू तिथि पता करना जरूरी होता है।
मृत्यु की तारीख भी न पता हो तो क्या करें?
अगर किसी परिवार को अपने दिवंगत सदस्य की मृत्यु की तारीख ही मालूम नहीं है, तो भी इसके लिए धार्मिक विधान बताया गया है। पितृ पक्ष में सर्वपितृ अमावस्या का दिन आता है, जिसे आश्विन अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन परिवार के ऐसे दिवंगत सदस्य के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण आदि किए जा सकते हैं, जिनकी मृत्यु की तारीख या तिथि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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