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वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने रच दिया इतिहास, 28 साल बाद एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पदक, 198 kg वजन उठाकर जीता रजत

Asian Games 2026: भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। महिलाओं के 49 किग्रा वेटलिफ्टिंग मुकाबले में मीराबाई ने कुल 198 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया है। यह एशियन गेम्स में उनका पहला पदक है। इसके साथ ही भारत ने वेटलिफ्टिंग में 28 साल बाद एशियाई खेलों का पदक जीता है।

स्नैच में 87 किग्रा का सफल प्रयास

मीराबाई ने स्नैच स्पर्धा की शुरुआत 83 किग्रा वजन से की। इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में 85 किग्रा वजन सफलतापूर्वक उठाया। तीसरे प्रयास में उन्होंने 87 किग्रा का सफल लिफ्ट किया। स्नैच के बाद वह पदक की दौड़ में मजबूती से बनी हुई थीं।

क्लीन एंड जर्क में उठाया 111 किग्रा

क्लीन एंड जर्क में मीराबाई ने 107 किग्रा के सफल प्रयास के साथ शुरुआत की। दूसरे प्रयास में उन्होंने 111 किग्रा वजन उठाया। इसके बाद तीसरे प्रयास की जरूरत नहीं पड़ी। इस तरह उनका कुल स्कोर 198 किग्रा रहा, जिसमें 87 किग्रा स्नैच और 111 किग्रा क्लीन एंड जर्क शामिल रहा।

उत्तर कोरिया की रि सोंग गुम ने जीता स्वर्ण

प्रतियोगिता में उत्तर कोरिया की रि सोंग गुम ने 215 किग्रा के कुल वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 94 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 121 किग्रा वजन उठाया। वहीं इंडोनेशिया की विजायाना लुलुक डियाना त्रि ने 191 किग्रा के कुल स्कोर के साथ कांस्य पदक हासिल किया। उन्होंने स्नैच में 88 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 103 किग्रा वजन उठाया।

28 साल बाद खत्म हुआ पदक का इंतजार

मीराबाई के रजत पदक के साथ एशियन गेम्स में भारतीय वेटलिफ्टिंग का 28 साल पुराना इंतजार खत्म हो गया। भारत ने इससे पहले 1998 बैंकॉक एशियन गेम्स में कर्णम मल्लेश्वरी के जरिए वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीता था। इसके बाद भारत इस खेल में एशियन गेम्स में कोई पदक नहीं जीत सका था। अब मीराबाई ने इस लंबे इंतजार को खत्म कर दिया है।

एशियन गेम्स में मीराबाई का पहला पदक

यह मीराबाई चानू का तीसरा एशियन गेम्स है। उन्होंने इससे पहले 2014 और 2018 में भी एशियाई खेलों में हिस्सा लिया था, लेकिन पदक जीतने में सफल नहीं हुई थीं। 2022 के एशियन गेम्स में वह चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सकी थीं। ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीत चुकीं मीराबाई के करियर में एशियन गेम्स का पदक अब तक एक बड़ी कमी बना हुआ था, जिसे उन्होंने 2026 में पूरा कर लिया।

भारत के कुल 15 एशियाड पदक

मीराबाई के रजत पदक से पहले भारत ने एशियन गेम्स के इतिहास में वेटलिफ्टिंग में कुल 14 पदक जीते थे। इनमें पांच रजत और नौ कांस्य पदक शामिल थे। अब मीराबाई के रजत के बाद भारत के इस खेल में कुल पदकों की संख्या 15 हो गई है। इनमें छह रजत और नौ कांस्य पदक शामिल हैं। हालांकि, भारत अभी तक एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक नहीं जीत सका है।

मीराबाई के लिए क्यों खास है यह रजत?

32 वर्षीय मीराबाई चानू के शानदार करियर में एशियन गेम्स का पदक लंबे समय से एक बड़ी कमी बना हुआ था। वह ओलंपिक में रजत, विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण और लगातार तीन राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। इसके बावजूद एशियन गेम्स में उन्हें लगातार निराशा का सामना करना पड़ा था। अब रजत पदक के साथ उन्होंने इस अधूरे काम को भी पूरा कर लिया है।

2014 में नौवें स्थान पर रही थीं

एशियन गेम्स में मीराबाई का सफर 2014 में शुरू हुआ था, जब वह नौवें स्थान पर रही थीं। इसके बाद पीठ की चोट के कारण वह 2018 एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले सकीं। 2023 में हांगझोउ एशियन गेम्स में उनके पास पदक जीतने का बड़ा मौका था, लेकिन चोट ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। क्लीन एंड जर्क में जांघ की चोट के बावजूद उन्होंने 117 किग्रा वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकीं और चौथे स्थान पर रहीं। वह कांस्य पदक से आठ किग्रा पीछे रह गई थीं। अब 2026 में रजत पदक जीतकर मीराबाई ने एशियन गेम्स में भी अपनी पदक सूची पूरी कर ली है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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