अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर जारी गतिरोध एक बार फिर हिंसक मोड़ ले चुका है। तालिबान सरकार के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि पूर्वी प्रांत नूरीस्तान के कामदेश जिले में सीमा पार से घुसे 28 आतंकवादियों को अफगान सेना ने मार गिराया है, जबकि 32 अन्य लड़ाकों को जिंदा गिरफ्तार कर लिया गया है। तालिबान का आरोप है कि इस घुसपैठ को पाकिस्तानी मिलिशिया और खुफिया एजेंसियों का सीधा समर्थन प्राप्त था, जिसका मुख्य उद्देश्य अफगान क्षेत्र में बड़े आतंकी हमलों को अंजाम देना था।
पाकिस्तान का पलटवार और आरोपों का खंडन
काबुल द्वारा लगाए गए इन संगीन आरोपों को पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह आधारहीन करार दिया है। इस्लामाबाद ने स्पष्ट किया कि उसकी खुफिया एजेंसियों या सुरक्षा बलों की नूरीस्तान घटना में कोई भूमिका नहीं है। पाकिस्तान ने तालिबान सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अफगान शासन को अपनी धरती से संचालित होने वाले उन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कठोर कदम उठाने चाहिए, जो पाकिस्तानी नागरिकों और सुरक्षा बलों को लगातार निशाना बना रहे हैं।
मित्रता से दुश्मनी तक का कूटनीतिक सफर
वर्ष 2021 में अमेरिका की वापसी के दौरान जब तालिबान ने काबुल की सत्ता संभाली थी, तब तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसका जोरदार स्वागत किया था। हालांकि, समय के साथ दोनों देशों के बीच संबंधों में भारी खटास आ चुकी है। वर्तमान शहबाज शरीफ सरकार का आरोप है कि तालिबान प्रशासन पाकिस्तानी तालिबान (TTP) को पनाह, फंडिंग और गोला-बारूद मुहैया करा रहा है। वहीं, तालिबान इन आरोपों को नकारते हुए उल्टे पाकिस्तान पर पूर्व अफगान सैनिकों और आईएस (IS) आतंकियों को प्रायोजित करने का आरोप लगा रहा है।
सीमा पार हमलों से बिगड़े दोनों देशों के हालात
पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष तेज हुए हैं, जिसमें पिछले साल काबुल पर हुई पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक भी शामिल है। हाल ही में पाकिस्तान के कोहाट जिले में हुए आत्मघाती हमले में 15 पुलिसकर्मियों समेत 24 लोग मारे गए थे, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। सीमा पार से लगातार हो रही गोलीबारी, हवाई हमलों और अविश्वास की बढ़ती खाई ने पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
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