Saudi Arabia Oil Pipeline Attack: कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। गुरुवार को कीमत करीब 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण दुनिया के प्रमुख तेल मार्गों में शामिल होर्मुज में टैंकरों की आवाजाही पहले ही लगभग ठप है। ऐसे समय में सऊदी अरब की एक अहम तेल पाइपलाइन का बंद होना भारत समेत एशिया के कई देशों के लिए चिंता बढ़ा रहा है।
ड्रोन हमले के बाद बंद पाइपलाइन
सऊदी अरब ने करीब 1200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को ड्रोन हमले के बाद अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब होर्मुज से बचते हुए अपना कच्चा तेल पश्चिमी तट के यनबू बंदरगाह तक पहुंचाता है। यहां से तेल भारत और एशिया के दूसरे देशों को भेजा जाता है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, पाइपलाइन को एहतियाती कदम के तौर पर बंद किया गया है।
पाइपलाइन पर हमला
गुरुवार सुबह सऊदी अरब के रियाद और मदीना क्षेत्रों में पाइपलाइन को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई। सैटेलाइट तस्वीरों में मदीना के दक्षिण में पाइपलाइन के एक हिस्से से काला धुआं उठता दिखाई दिया। हमले में कुछ लोगों के घायल होने और पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। फिलहाल नुकसान का आकलन किया जा रहा है। हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है।
इराक से हमले के संकेत
हमले को लेकर बगदाद और रियाद दोनों ने संकेत दिया है कि ड्रोन हमला इराक से किया गया। इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया एक्टिव हैं। हालांकि, अभी तक किसी संगठन ने हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली है।
रोज 40-50 लाख बैरल सप्लाई
शिप-ट्रैकिंग कंपनियों और बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन करीब 40 लाख से 50 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया जा रहा था। यह दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 4-5% है। ऐसे समय में जब होर्मुज संकट के कारण पहले से ही तेल की कमी और सप्लाई बाधित होने की आशंका बनी हुई है, इस वैकल्पिक मार्ग का बंद होना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
भारत की सप्लाई पर असर
सऊदी अरब भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का सप्लायर है। ईरान युद्ध से पहले सितंबर से फरवरी के बीच सऊदी अरब से भारत को रोजाना करीब 7 लाख 43 हजार बैरल तेल की सप्लाई हो रही थी। फरवरी से अगस्त के बीच यह घटकर करीब 4 लाख 40 हजार बैरल प्रतिदिन रह गई।
सऊदी उत्पादन भी प्रभावित
अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण सऊदी अरब में कच्चे तेल का उत्पादन 36 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। अगस्त में उसके तेल निर्यात में भी 40% की गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में पाइपलाइन बंद होने से सप्लाई व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
भारत के लिए बढ़ी चुनौती
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। यदि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है और यनबू बंदरगाह के जरिए एशिया जाने वाली सप्लाई प्रभावित होती है, तो भारत समेत एशियाई खरीदारों को दूसरे स्रोतों या लंबे समुद्री रास्तों से तेल मंगाना पड़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमत के साथ शिपिंग और बीमा लागत भी बढ़ने की आशंका है। इसका असर आगे चलकर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
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