नई दिल्ली में चल रहे BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों की प्रतिबंध नीति पर तीखी प्रतिक्रिया दी। BRICS बिजनेस फोरम में उन्होंने दावा किया कि रूस पर 30,000 से ज्यादा प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद रूसी अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। पुतिन ने इन प्रतिबंधों को अनुचित बताते हुए कहा कि रूस ने इस दबाव के बीच अपनी आर्थिक क्षमता और लचीलापन बढ़ाया है।
रूस पर 30 हजार से ज्यादा प्रतिबंधों का दावा
पुतिन ने कहा कि मॉस्को के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों की संख्या 30,000 से अधिक है। उनके मुताबिक, यह संख्या पश्चिमी देशों द्वारा दुनिया के अन्य सभी देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों की कुल संख्या से करीब दोगुनी है। रूसी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि दबाव बनाने के लिए पश्चिमी देशों ने परिवहन मार्गों और बुनियादी ढांचे को प्रभावित करने तथा अन्य तरह के प्रतिबंध लगाने जैसे तरीके अपनाए हैं।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर के प्रतिबंधों के बावजूद रूस की आर्थिक गतिविधियां जारी हैं और देश ने बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अपनी अर्थव्यवस्था को ढालने में सफलता हासिल की है।
वैश्विक औसत से ज्यादा आर्थिक वृद्धि का दावा
BRICS बिजनेस फोरम में रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में रूस की आर्थिक वृद्धि वैश्विक औसत से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूसी अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत और लचीली बनी है। रूस पर आर्थिक दबाव का सिलसिला अभी भी जारी है। गौरतलब है कि अगस्त में अमेरिकी सीनेट ने ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026’ को 86-11 वोट से पारित किया था। इस कानून के तहत रूसी अधिकारियों और वित्तीय संस्थानों के साथ कथित गुप्त सैन्य बेड़े को निशाना बनाते हुए प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंधों का प्रावधान है।
BRICS और पश्चिम के बीच बढ़ते तनाव का जिक्र
पुतिन ने BRICS देशों और पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्धा के बढ़ते टकरावपूर्ण स्वरूप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दबाव बनाने की रणनीति अब सामान्य आर्थिक उपायों तक सीमित नहीं रह गई है। रूसी राष्ट्रपति ने पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचाने, अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारों को बाधित करने और समुद्री जहाजों को जब्त किए जाने जैसी घटनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने अन्य देशों पर लगाए जाने वाले द्वितीयक प्रतिबंधों की भी आलोचना की। पुतिन के मुताबिक, पश्चिमी देश रूस के साथ आर्थिक संबंध रखने वाली सरकारों और कारोबारियों पर भी दबाव डाल रहे हैं। उनका कहना था कि इन परिस्थितियों में रूस ने अपनी आर्थिक और राजनीतिक लचीलापन बढ़ाकर जवाब दिया है। हालांकि, पुतिन की ओर से लगाए गए इन आरोपों और दावों को उनके बयान के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
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