Iran-US Pakistan Mediation: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम कराने की पहले भी कोशिश कर चुका पाकिस्तान एक बार फिर दोनों देशों के बीच सुलह कराने के लिए आगे आया है। पाकिस्तान ने कहा है कि वह ‘एक ईमानदार और सच्चे मध्यस्थ’ के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने सभी से संयम बरतने और ऐसे फैसलों को लेने से बचने की अपील की है, जिनसे तनाव ज्यादा बढ़ सकता है।
ईरानी गृह मंत्री के दौरे के दौरान आया बयान
यह बयान तब आया है जब ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के दौरे पर है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने खाड़ी क्षेत्र में हालिया तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने की जरुरत पर जोर दिया है।
आसिम मुनीर से हुई अहम मुलाकात
पाकिस्तान की विदेश नीति में सेना की भूमिका एक बार फिर उस समय सामने आई, जब ईरानी गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर में चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच आपसी हितों, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय सुरक्षा तथा सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
पाकिस्तान की भूमिका की सराहना
बैठक के दौरान ईरानी पक्ष ने क्षेत्रीय तनाव कम करने, तनाव घटाने को बढ़ावा देने और शांति बनाए रखने में पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों की सराहना की। पाकिस्तानी सेना के बयान में कहा गया, ‘यह बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने और आपसी खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए करीबी तालमेल और सहयोग के तरीकों को बनाए रखने के संकल्प को दोहराने के साथ खत्म हुई।’
शहबाज शरीफ ने दोहराया रुख
शहबाज शरीफ ने भी सभी पक्षों से संयम बरतने और ऐसे कदम उठाने से बचने की अपील की है, जिनसे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा, ‘पाकिस्तान एक ईमानदार और सच्चे मध्यस्थ और मुद्दों को पटरी पर लाने के लिए अपनी भूमिका निभाता रहेगा, प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के प्रति पाकिस्तान की मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया।’
खामेनेई और राष्ट्रपति के लिए भेजा संदेश
शहबाज शरीफ ने इस महीने की शुरुआत में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के लिए शुभकामनाएं भी भेजीं। वहीं मोमेनी ने पाकिस्तान सरकार के स्वागत के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से इस्लामाबाद आया है। उन्होंने इस्लामाबाद समझौता की अथक मध्यस्थता कोशिशों की भी सराहना की।
पश्चिम एशिया के हालात बने चिंता का कारण
मोमेनी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान के खिलाफ लगातार अमेरिकी हमलों के कारण पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है। माना जा रहा है कि बड़े पैमाने पर हमलों के बावजूद पाकिस्तान समेत कुछ अन्य देश पर्दे के पीछे दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू कराने और संघर्ष रोकने की कोशिशों में जुटे रहे हैं।
क्या पाकिस्तान निभा पाएगा पंच की भूमिका?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान के लिए पूरी तरह निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाना आसान नहीं होगा। एक ओर उसके अमेरिका के साथ सुरक्षा और रणनीतिक संबंध हैं, तो दूसरी ओर ईरान के साथ सीमा और ऊर्जा से जुड़े हित भी जुड़े हुए हैं। वहीं पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग भी है, जिससे उसकी स्थिति और कठिन हो जाती है।
वैश्विक छवि मजबूत करने की कोशिश
एक्सपर्ट्स के अनुसार, मध्यस्थता की यह पेशकश पाकिस्तान के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि मजबूत करने का अवसर भी है। आर्थिक चुनौतियों और घरेलू राजनीतिक दबावों के बीच इस्लामाबाद खुद को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और एक्टिव कूटनीतिक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
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