भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना रुख और स्पष्ट करते हुए कहा है कि 65 वर्ष पुराने इस समझौते को मौजूदा स्वरूप में फिर से लागू नहीं किया जा सकता। सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भविष्य में यदि इस व्यवस्था पर आगे बढ़ना है, तो इसके लिए संशोधित ढांचा तैयार करना होगा। भारत का यह भी कहना है कि किसी भी नई व्यवस्था से पहले पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह समाप्त करने का भरोसेमंद प्रमाण देना होगा।
नई व्यवस्था के लिए रखी शर्त
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नदियों के जल बंटवारे से जुड़े प्रावधानों को दोबारा लागू करने की स्थिति तभी बनेगी, जब उन्हें नए और संशोधित स्वरूप में स्वीकार किया जाए। भारत का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पुरानी संधि पहले की तरह जारी रखना व्यावहारिक नहीं है। सूत्रों ने यह भी कहा कि भारत फिलहाल संधि से औपचारिक रूप से बाहर निकलने की प्रक्रिया नहीं चला रहा है, लेकिन एक संप्रभु राष्ट्र होने के नाते उसके पास अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप निर्णय लेने का अधिकार सुरक्षित है।
पाकिस्तान के दावों को बताया गलत
भारत ने पाकिस्तान के उस दावे को भी खारिज किया है, जिसमें कहा गया था कि संधि के निलंबन के कारण वहां जल संकट पैदा हो गया है। भारतीय पक्ष का कहना है कि पाकिस्तान में पानी की कमी का बड़ा कारण वहां पर्याप्त भंडारण क्षमता का अभाव, वितरण व्यवस्था में रिसाव और विभिन्न प्रांतों के बीच जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद हैं।
पहलगाम हमले के बाद लिया गया था फैसला
भारत ने पिछले वर्ष अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था। इस हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी और इसकी जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी। इसके बाद भारत ने कई कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाए, जिनमें संधि का निलंबन भी शामिल था। बाद में मई में भारत ने आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भी चलाया।
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