HomeBreaking Newsराजनाथ सिंह और श्रीलंकाई राष्ट्रपति की मुलाकात, विकास और सुरक्षा को लेकर...

राजनाथ सिंह और श्रीलंकाई राष्ट्रपति की मुलाकात, विकास और सुरक्षा को लेकर हुई बड़ी चर्चा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह(Rajnath Singh) ने बुधवार को कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर बातचीत की। दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों के विकास और आम लोगों के हित के लिए मिलकर काम जारी रखा जाएगा।

बैठक में राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राष्ट्रपति दिसानायके को शुभकामनाएं भी दीं। बातचीत के दौरान क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि बनाए रखने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

भारत-श्रीलंका संबंधों पर दिया जोर

बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने इसे सकारात्मक और उपयोगी बातचीत बताया। उन्होंने श्रीलंकाई सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर राष्ट्रपति दिसानायके को बधाई दी।

सिंह ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच केवल पड़ोसी देशों का रिश्ता नहीं है, बल्कि दोनों के बीच पुराने सभ्यतागत संबंध भी हैं। उन्होंने दोनों देशों को समुद्री साझेदार बताते हुए कहा कि भारत क्षेत्र की सुरक्षा और विकास के लिए श्रीलंका के साथ सहयोग करता रहेगा।

भारतीय समुदाय से भी मिले रक्षा मंत्री

अपने दौरे के दौरान राजनाथ सिंह ने मंगलवार को श्रीलंका में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में प्रवासी भारतीयों की भूमिका की सराहना की।

उन्होंने कहा कि श्रीलंका में भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है। साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुश्किल समय में भारत श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे कोलंबो 

राजनाथ सिंह तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर श्रीलंका पहुंचे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा और समुद्री सहयोग को और मजबूत करना है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत और श्रीलंका के रिश्ते सुरक्षा, व्यापार, अर्थव्यवस्था और लोगों के आपसी संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत ने सहायता पहुंचाई थी। वहीं, 2025 में चक्रवात डिटवाह के बाद भी भारत ने शुरुआती मदद उपलब्ध कराने वाले देशों में भूमिका निभाई थी। यह सहयोग भारत की ‘Neighbourhood First’ नीति और प्रधानमंत्री मोदी के MAHASAGAR विजन के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

यह भी पढ़ें : चमत्कार या कुछ और? बेबस इंजीनियर, हर तकनीक फेल! 170 साल पुरानी भगवान हनुमान प्रतिमा के आगे…

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments