Delhi Illegal Construction: सत्य निकेतन में पीजी हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को जहां भी नियमों का उल्लंघन कर निर्माण मिला, वहां सख्त कार्रवाई करने और जरूरत पड़ने पर बुलडोजर चलाकर उसे हटाने के निर्देश दिए हैं।
आज कई इलाकों में कार्रवाई
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बुधवार को अशोक नगर, लक्ष्मी नगर और पांडव नगर समेत दिल्ली के कई इलाकों में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहकर अभियान की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी PG-हॉस्टलों की होगी जांच
मुख्यमंत्री ने दिल्ली के सभी PG और हॉस्टलों का सघन निरीक्षण कराने को कहा है। जांच के दौरान अवैध निर्माण या भवन नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “दिल्ली के सभी PG हॉस्टलों की सघन जांच करें और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करें। बिल्डिंग रिकॉर्ड की जांच करें, यह पता लगाएं कि अवैध निर्माण कब और किसके अधिकार क्षेत्र में हुआ था।”
रिकॉर्ड से तय होगी जिम्मेदारी
सरकार का जोर सिर्फ अवैध निर्माण हटाने तक सीमित नहीं है। बिल्डिंग रिकॉर्ड खंगालकर यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित इमारत में अवैध निर्माण किस वर्ष हुआ और उस समय क्षेत्र किस अधिकारी या प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में था। इससे निर्माण की समयावधि और उससे जुड़ी जिम्मेदारी निर्धारित करने में मदद मिलेगी।
मंगलवार को 35 इमारतों पर कार्रवाई
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने अनधिकृत और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ अभियान तेज किया है। मंगलवार को MCD के 12 जोन में 35 इमारतों को ध्वस्त किया गया। इनमें रोहिणी में 6, नरेला में 3, सिविल लाइंस में 3 और शाहदरा नॉर्थ में 6 इमारतों पर कार्रवाई शामिल है। इसके अलावा करोल बाग के बड़े गोदामों में भी कार्रवाई की गई।
जून से अब तक बड़ी कार्रवाई
3 जून से 3 सितंबर 2026 के बीच MCD ने 983 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की और 464 संपत्तियों को सील किया। इसी अवधि में अनधिकृत निर्माण के संबंध में 1,516 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, जबकि ध्वस्तीकरण से जुड़े 726 आदेश जारी हुए।
तीन लाख संपत्तियों का सर्वे
MCD ने आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक दुरुपयोग की पहचान के लिए तीन महीने तक सर्वे भी किया। इस दौरान 404 कॉलोनियों और 168 वार्डों में लगभग 300,000 संपत्तियों का सर्वे किया गया।
सत्य निकेतन हादसे ने बढ़ाई चिंता
यह अभियान दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG भवन गिरने के बाद तेज हुआ है। 6 सितंबर को हुए इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। शुरुआती जांच में इमारत में अतिरिक्त निर्माण, बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर बिना अनुमति मरम्मत तथा सुरक्षा जांच में खामियों जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
साकेत और मालवीय नगर में भी हादसे
सत्य निकेतन की घटना से पहले साकेत और मालवीय नगर में भी भवन हादसे सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं के बाद असुरक्षित और अनधिकृत निर्माण को लेकर प्रशासन की चिंता और बढ़ी है।
सीलिंग और FIR की कार्रवाई
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने चार मंजिल से ऊपर के अवैध निर्माण को सील करने की कार्रवाई के आदेश दिए। आसपास की इमारतों की स्थिति की भी जांच की गई। हादसे के मामले में भवन मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और मुख्यमंत्री ने मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश भी दिए हैं।
PG सुरक्षा के लिए कानून का मसौदा
दिल्ली सरकार निजी हॉस्टल और PG को विनियमित करने के लिए कानून का मसौदा भी तैयार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में PG के लिए लाइसेंस, पुलिस क्लीयरेंस, स्ट्रक्चरल और फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र तथा सार्वजनिक पोर्टल पर पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
अब व्यापक अभियान की तैयारी
मुख्यमंत्री के ताजा निर्देशों के बाद दिल्ली में अवैध निर्माण और PG-हॉस्टलों की सुरक्षा जांच को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी है। सरकार का फोकस अवैध निर्माण हटाने के साथ यह तय करने पर भी है कि निर्माण कब हुआ और उस समय उसकी निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी या प्राधिकरण के पास थी।
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