यमुना नदी के फ्लडप्लेन से जुड़े करीब एक दशक पुराने मामले में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के 2017 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 2016 में आयोजित वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल के दौरान यमुना फ्लडप्लेन को पर्यावरणीय नुकसान पहुंचाने के लिए संस्था को जिम्मेदार ठहराया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को निर्देश दिया है कि आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ी संस्था व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया (VVKI) द्वारा जमा कराए गए 5 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि वापस की जाए।
नुकसान से सीधे जुड़ाव का प्रमाण नहीं मिला
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी संस्था या व्यक्ति को पर्यावरणीय नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराने के लिए कथित गतिविधि और नुकसान के बीच सीधा संबंध स्थापित होना जरूरी है। अदालत के अनुसार, उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसा प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि 2016 का वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल ही यमुना के संवेदनशील फ्लडप्लेन के पर्यावरणीय नुकसान का कारण था।
2016 में हुआ था वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल
आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय **वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल** का आयोजन 11 से 13 मार्च 2016 के बीच दिल्ली में यमुना के किनारे किया गया था। आयोजन से पहले यमुना फ्लडप्लेन के पर्यावरण को लेकर मामला NGT पहुंचा था।
NGT ने कार्यक्रम को आयोजित करने की अनुमति देते हुए संस्था को **5 करोड़ रुपये की अंतरिम पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति** जमा करने का निर्देश दिया था। बाद में दिसंबर 2017 में NGT ने संस्था को फ्लडप्लेन को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार माना और जमा राशि को यमुना फ्लडप्लेन के पुनर्वास एवं बहाली कार्य में इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था।
करीब दस साल चली कानूनी लड़ाई
NGT के फैसले को आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ी संस्था VVKI ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इस मामले में लगभग एक दशक तक कानूनी प्रक्रिया चली।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद NGT द्वारा तय की गई संस्था की पर्यावरणीय जिम्मेदारी का आदेश निरस्त हो गया है और जमा किए गए 5 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, अदालत ने यमुना फ्लडपेन के संरक्षण और पुनर्वास को लेकर DDA की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया है।
DDA की भूमिका पर भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यमुना के संवेदनशील फ्लडपेन की सुरक्षा सुनिश्चित करना DDA की जिम्मेदारी थी। अदालत ने प्राधिकरण को NGT के निर्देशों के अनुरूप यमुना फ्लडपेन के पुनर्वास और संरक्षण का काम जारी रखने का निर्देश दिया है।
आर्ट ऑफ लिविंग के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक राहत
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आर्ट ऑफ लिविंग और VVKI के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 2016 के आयोजन और कथित पर्यावरणीय नुकसान के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ।
इस फैसले के साथ 2016 के वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल से जुड़ा लगभग दस वर्ष पुराना पर्यावरणीय विवाद एक महत्वपूर्ण न्यायिक मोड़ पर पहुंच गया है। वहीं, यमुना फ्लडपेन के संरक्षण और उसके पुनर्वास की जिम्मेदारी संबंधित सरकारी एजेंसियों पर बनी रहेगी।
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