फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा(Meta) एक बार फिर कानूनी विवाद में आ गई है। इस बार अमेरिका के टेनेसी राज्य ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि मेटा ने इंस्टाग्राम(Instagram) को इस तरह डिजाइन किया है कि किशोर (टीनएजर्स) लंबे समय तक ऐप का इस्तेमाल करते रहें। राज्य का कहना है कि इससे युवाओं में सोशल मीडिया की लत बढ़ रही है और उनके दिमाग पर भी इसका गहरा और गलत असर पड़ रहा है।
मुकदमे में दावा किया गया है कि Meta के पास ऐसी आंतरिक रिसर्च मौजूद थी जिसमें इंस्टाग्राम के टीनएजर्स पर पड़ने वाले बुरे असर का जिक्र किया गया था। इसके साथ ही यह भी आरोप है कि कंपनी ने इस रिसर्च को आम लोगों के सामने साझा नहीं किया गया। टेनेसी के अटॉर्नी जनरल जोनाथन स्करमेटी के कार्यालय का कहना है कि यह जानकारी यूजर्स से छिपाई गई है।
मार्क जकरबर्ग पर भी उठे सवाल
केस में यह भी कहा गया है कि कंपनी के कुछ कर्मचारियों ने मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग को रिसर्च के परिणामों की जानकारी दी थी। आरोप है कि इसके बावजूद नुकसान को कम करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद नुकसानदायक कंटेंट को लेकर सार्वजनिक रूप से भ्रामक बयान दिए गए ।
कोर्ट से बदलाव की मांग
टेनेसी राज्य ने अदालत से मेटा पर जुर्माना लगाने और इंस्टाग्राम के कुछ फीचर्स में बदलाव कराने की मांग की है। इनमें ऑटो-प्ले, इंस्टाग्राम रील्स और बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन जैसे फीचर्स शामिल हैं जिनके बारे में कहा गया है कि ये यूजर्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखते हैं।
मेटा ने क्या कहा?
मेटा का कहना है कि राज्य के कई आरोप यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट पर आधारित हैं। कंपनी ने यह भी तर्क दिया है कि अमेरिका के कम्युनिकेशन डिसेंसी एक्ट के सेक्शन 230 के तहत थर्ड-पार्टी द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। अब अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि लगाए गए आरोप कितने सही हैं।
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