Hariyali Teej 2026: सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। द्रिग पंचांग के अनुसार, इस साल हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त को रखा जाएगा। इस दिन सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा का भी इस दिन विशेष महत्व माना गया है।
साल में 7 बार आती है तीज
हरियाली तीज की तरह हिंदू धर्म के अलग-अलग पवित्र महीनों में तृतीया तिथि से जुड़े कई पर्व मनाए जाते हैं। अलग-अलग महीनों में इनका नाम और धार्मिक महत्व भी अलग होता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, साल में कुल 7 प्रमुख तीज आती हैं।
हरियाली तीज में भगवान शिव-माता पार्वती के मिलन की मान्यता
हरियाली तीज सावन शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। सावन की हरियाली और वर्षा ऋतु के कारण इसे हरियाली तीज कहा जाता है। इसे भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था, जिसकी पूर्णता इसी दिन हुई थी।
कजरी तीज
कजरी तीज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इसे कजली तीज और सातुड़ी तीज भी कहा जाता है। यह पर्व खासतौर पर राजस्थान में लोकप्रिय है। राजस्थान के बूंदी में इस अवसर पर माता पार्वती की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्रदेव की पूजा का विधान माना जाता है।
हरतालिका तीज
हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है। इसे तीज के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
आखा तीज यानी अक्षय तृतीया
आखा तीज को अक्षय तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में इसे बेहद शुभ तिथि माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य अक्षय फल देते हैं। इसलिए लोग सोना खरीदने के साथ विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था और महाभारत काल में पांडवों को अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई थी। जलदान और पुण्य कार्यों के लिए भी यह तिथि विशेष मानी जाती है।
गणगौर तृतीया
गणगौर तृतीया चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है। ‘गण’ भगवान शिव और ‘गौर’ माता पार्वती का प्रतीक है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की प्रार्थना करती हैं।
रंभा तीज
रंभा तीज ज्येष्ठ माह में मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अप्सरा रंभा और माता पार्वती की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक यह व्रत करने से पति की आयु लंबी होती है। महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और रात में कथा सुनने के बाद ही जल ग्रहण करती हैं।
वराह तीज
वराह तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। यह पर्व भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी यानी भूदेवी को मुक्त कराया था। इस दिन भगवान वराह और भूदेवी की पूजा की जाती है। खास बात यह है कि यह व्रत केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष भी श्रद्धापूर्वक इसे कर सकते हैं।
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