पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तीन महीने की शांति के बाद तनाव एक बार फिर हिंसक झड़प में बदल गया है। बलूचिस्तान के किला अब्दुल्ला जिले में स्थित गुलिस्तान बॉर्डर पर पाकिस्तानी सेना और अफगान तालिबान के बीच खूनी मुठभेड़ हुई है। डूरंड लाइन से मात्र 8 किलोमीटर दूर हुए इस सीमाई संघर्ष के बाद दोनों मुल्कों के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। जहां पाकिस्तानी मीडिया कई तालिबानी लड़ाकों को ढेर करने का दावा कर रही है, वहीं अफगानिस्तानी मीडिया के मुताबिक तालिबान की भारी गोलाबारी के चलते पाकिस्तानी सैनिकों को कंधार और स्पिन बोल्डक से सटे इलाकों में अपनी सैन्य चौकियां छोड़कर भागना पड़ा है।
A source from across the hypothetical Durand Line told TOLOnews that Pakistani forces have abandoned several of their posts near the line along Registan, Shorabak and Spin Boldak districts of Kandahar and are leaving the area.
The source added that clashes also broke out on… pic.twitter.com/Cg6TYtwHvI
— TOLOnews English (@TOLONewsEnglish) September 24, 2026
हवाई हमलों और ड्रोन अटैक के बाद भड़की जंग
इस ताजा सैन्य टकराव की शुरुआत उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में पुलिस ठिकाने पर हुए हमले के बाद हुई, जिसमें 24 लोगों की जान चली गई थी। इसके जवाब में पाकिस्तान ने गुरुवार को अफगानिस्तान के भीतर 10 स्थानों पर हवाई और ड्रोन हमले किए तथा 8 अफगानी ड्रोन मार गिराने का दावा किया। तालिबान सरकार का आरोप है कि इन हमलों में चार बेकसूर आम नागरिकों की जान गई है। इसी भड़काऊ कार्रवाई के जवाब में अफगान सेना ने बलूचिस्तान के सीमावर्ती गुलिस्तान सेक्टर और स्पिन बोल्डक में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें चार पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और उनकी एक चौकी तबाह हो गई।
मक्का पैक्ट से बचने के लिए हमले कर रहा पाकिस्तान
बढ़ते तनाव के बीच अफगान तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान को गंभीर परिणाम भुगतने की कड़ी चेतावनी दी है। मुजाहिद ने कहा कि इस्लामाबाद अपने देश की राजनीतिक व आर्थिक विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह आक्रामकता दिखा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ‘मक्का पैक्ट’ की अपनी अंतर-राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से भागने का बहाना ढूंढ रही है और दुनिया को यह दिखाना चाहती है कि वह अफगानिस्तान के साथ युद्ध में उलझी है। मुजाहिद ने साफ किया कि काबुल इस सैन्य दुस्साहस का माकूल और सख्त जवाब देगा।
रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है गुलिस्तान इलाका
गुलिस्तान सेक्टर सीमा के पास होने के कारण कूटनीतिक और सैन्य दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां अचाकजाई, काकर, तारीन और सैयद जैसी लड़ाकू जनजातियां निवास करती हैं। फिलहाल दोनों ओर से आधी रात के बाद भी रुक-रुक कर भारी गोलाबारी जारी रहने की खबर है। यद्यपि दोनों देशों के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने मौतों के आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन डूरंड लाइन पर चौकियों को खाली किए जाने और सीमा पार से हो रही गोलाबारी ने पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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