प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान उज़्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के नेताओं को पारंपरिक भारतीय उत्पादों का एक खास कलेक्शन भेंट किया। इन उपहारों में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कारीगरी और क्षेत्रीय परंपराओं की झलक मिलती है, हर चीज़ देश की पहचान के एक अलग पहलू को दिखाती है।
पीएम मोदी ने किर्गिस्तान और उज़्बेकिस्तान के नेताओं को पारंपरिक भारतीय शिल्प, साहित्य और ऐतिहासिक यादगार चीज़ें भेंट कीं। उपहारों में प्रीमियम कांगड़ा चाय भी शामिल थी, जो अपनी खास खुशबू और हल्के स्वाद के लिए जानी जाती है। हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में पैदा होने वाली इस चाय का लंबा इतिहास है और यह अपनी अनोखी खासियत के लिए पहचानी जाती है। कांगड़ा चाय भेंट करके, भारत की मशहूर चाय-उत्पादन विरासत को कूटनीतिक आदान-प्रदान में जगह मिली। इसके अलावा, पीएम मोदी ने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति को लद्दाखी ‘त्सुंग-दुल’ भेंट किया।
पारंपरिक शिल्प और टेक्सटाइल
PHOTO | Gift given by PM Modi to Spouse of President of Uzbekistan: Marble Inlay Casket with Banarasi Silk Stole
The Marble Inlay Casket with Banarasi Silk Stole brings together two distinguished Indian craft traditions—Agra’s fine marble inlay and Varanasi’s renowned silk… pic.twitter.com/cxTBB130QK
— Press Trust of India (@PTI_News) September 1, 2026
एक और खास उपहार चंदन की लकड़ी से बनी ‘शता तंत्री’ थी, जो भारत की चंदन पर की जाने वाली बारीक कारीगरी से जुड़ी एक पारंपरिक कला है। चंदन पर नक्काशी सदियों से भारतीय हस्तशिल्प परंपराओं का अहम हिस्सा रही है, जिसमें कारीगर खुशबूदार लकड़ी से बारीक डिज़ाइन और सजावटी चीज़ें बनाते हैं।
पीएम मोदी ने उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति की पत्नी को संगमरमर की इनले वाली एक डिब्बी और बनारसी सिल्क का स्टोल भेंट किया। बनारसी सिल्क का स्टोल उत्तर प्रदेश के वाराणसी की सदियों पुरानी बुनाई परंपराओं को दर्शाता है। बनारसी सिल्क अपनी शानदार बनावट, बारीक डिज़ाइन और बुनाई की खास तकनीकों के लिए मशहूर है। यह कपड़ा खास तौर पर ज़री के काम और भारतीय कला व संस्कृति से प्रेरित पारंपरिक पैटर्न के लिए जाना जाता है।
सांस्कृतिक कूटनीति का महत्व
इन उपहारों का चुनाव यह दिखाता है कि भारत सांस्कृतिक कूटनीति के हिस्से के तौर पर पारंपरिक शिल्प, टेक्सटाइल और क्षेत्रीय उत्पादों के इस्तेमाल पर कितना ज़ोर दे रहा है। ये सिर्फ़ रस्म निभाने के लिए दिए जाने वाले उपहार नहीं हैं, बल्कि ऐसी चीज़ें अंतरराष्ट्रीय नेताओं को भारत की विविध कलात्मक और खान-पान की परंपराओं की झलक दिखाती हैं।
यह आदान-प्रदान SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ, जो एक अहम बहुपक्षीय मंच है। यह मंच यूरेशिया के देशों को एक साथ लाता है ताकि वे क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चर्चा कर सकें।
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