गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘खेलो इंडिया स्कीम’ के नए रूप और ‘नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन्स (ANSFs) को सहायता’ देने वाली बेहतर स्कीम को मंज़ूरी दी। 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए इनका कुल बजट 36,441 करोड़ रुपये है। सरकार ने इसे आज़ादी के बाद भारत का सबसे बड़ा खेल विकास कार्यक्रम बताया है।
इस बड़े कार्यक्रम का मकसद ज़मीनी स्तर से लेकर टॉप लेवल तक भारत के खेल इकोसिस्टम को मज़बूत करना है। साथ ही, यह देश के लंबे समय के लक्ष्यों को भी सपोर्ट करेगा, जिसमें 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक व पैरालंपिक गेम्स की मेज़बानी के लिए भारत की दावेदारी शामिल है।
पिछली ‘खेलो इंडिया स्कीम’ के बजट से लगभग आठ गुना ज़्यादा
मंज़ूर किया गया बजट पिछली ‘खेलो इंडिया स्कीम’ के बजट से लगभग आठ गुना ज़्यादा है। यह दिखाता है कि सरकार खेल को युवाओं के विकास और राष्ट्र-निर्माण का एक अहम हिस्सा बनाना चाहती है। इस नई स्कीम का मकसद युवा और टैलेंटेड खिलाड़ियों के लिए एक व्यवस्थित रास्ता बनाना है, ताकि उनकी पहचान हो सके और उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिले, चाहे वे किसी भी इलाके या आर्थिक बैकग्राउंड से हों।
‘खेलो भारत नीति 2025’ और ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020’ के अनुरूप, यह कार्यक्रम खेल को शिक्षा, फिटनेस, टेक्नोलॉजी और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग के साथ जोड़ता है। इस स्कीम की एक खास बात खिलाड़ियों के विकास के लिए एक व्यापक रास्ता बनाना है। यह खिलाड़ियों को टैलेंट की पहचान और वैज्ञानिक ट्रेनिंग से लेकर इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन और ओलंपिक की तैयारी तक में मदद करता है।
देश भर में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के लिए, सरकार एक इंटीग्रेटेड नेटवर्क का विस्तार करेगी। इसमें नेशनल सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस (NCOEs), खेलो इंडिया सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस (KICoEs), स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) ट्रेनिंग सेंटर्स, खेलो इंडिया एक्रेडिटेड एकेडमीज़ (KIAAs), खेलो इंडिया सेंटर्स (KICs) और सशस्त्र बलों की यूथ स्पोर्ट्स कंपनियाँ (YSCs) शामिल होंगी।
मंत्रिमंडल ने दो नई पहलों ‘खेलो इंडिया फीडर स्कूल्स (KIFS)’ और ‘खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय (KIUV)’ को भी मंज़ूरी दी है। इनका मकसद खेल को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ जोड़ना और शुरुआती स्तर पर ही खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है।
एथलीट डेवलपमेंट इकोसिस्टम लगभग दस गुना बढ़ने की उम्मीद
जारी बयान के अनुसार, इस स्कीम में मौजूदा ‘खेलो इंडिया एथलीट्स’ कार्यक्रम के साथ-साथ ‘इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स (E-KIAs)’ की एक नई कैटेगरी भी शुरू की गई है। इस कदम से भारत का व्यवस्थित एथलीट डेवलपमेंट इकोसिस्टम लगभग दस गुना बढ़ने की उम्मीद है, जिससे हज़ारों और युवा एथलीटों को प्रोफेशनल कोचिंग, साइंटिफिक सपोर्ट और लंबे समय तक मेंटरिंग मिल सकेगी।
सरकार खास कमेटियों, ज़ोनल निकायों, टैलेंट स्काउट्स और हाई-परफॉर्मेंस मैनेजरों के ज़रिए टैलेंट की पहचान को भी मज़बूत करेगी। साथ ही, ग्रासरूट लेवल की प्रतियोगिताओं से लेकर ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) तक एक प्रोग्रेशन पाथवे (आगे बढ़ने का रास्ता) भी तैयार करेगी।
नए रूप में तैयार यह प्रोग्राम घरेलू प्रतियोगिताओं पर भी ज़्यादा ज़ोर देगा। इसके तहत स्कूल, यूनिवर्सिटी, रीजनल और खेल-विशिष्ट लीगों के साथ-साथ नेशनल चैंपियनशिप को भी सपोर्ट किया जाएगा, ताकि एथलीटों को नियमित रूप से कॉम्पिटिटिव अनुभव मिल सके।
महिला एथलीटों, पैरा-एथलीटों और पारंपरिक खेलों पर खास ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, यह स्कीम भारत में नेशनल गेम्स और बड़े इंटरनेशनल स्पोर्ट्स इवेंट्स के आयोजन के लिए भी सपोर्ट देगी। कैबिनेट ने 2026-31 के लिए ‘नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन्स (ANSFs) को सहायता’ देने वाली स्कीम को भी मज़बूत करने की मंज़ूरी दी है। यह स्कीम कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, आधुनिक उपकरणों, इंटरनेशनल अनुभव, विदेशी एक्सपर्ट्स और ग्लोबल प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए फंड देगी, और साथ ही भारत के पारंपरिक खेलों को इंटरनेशनल लेवल पर बढ़ावा भी देगी।
सरकार ने कहा कि नए रूप में तैयार ‘खेलो इंडिया स्कीम’ का मकसद एक मज़बूत स्पोर्ट्स कल्चर बनाना, एथलीट डेवलपमेंट को बेहतर करना और ‘विकसित भारत 2047’ विज़न के तहत भारत को दुनिया के प्रमुख स्पोर्ट्स देशों में शामिल करना है।
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