उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन लेने वाले लाखों अपात्र लाभार्थियों की पहचान होने के बाद सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 37,72,629 ऐसे लोग मिले हैं, जो पात्र न होने के बावजूद राशन योजना का लाभ ले रहे थे। अब राज्य सरकार इन मामलों का भौतिक सत्यापन कर अपात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों के राशन कार्ड निरस्त करने की प्रक्रिया में जुटी है।
सत्यापन में सामने आए लाखों अपात्र
केंद्र की ओर से 56,94,540 संदिग्ध राशन कार्डों की सूची उपलब्ध कराई गई थी, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्ति निरीक्षकों के माध्यम से इनका भौतिक सत्यापन कराया। जांच के दौरान पोर्टल पर 37,72,629 लाभार्थियों को अपात्र चिह्नित किया गया। इनमें से 35,37,352 लाभार्थियों का डेटा निरस्त कर दिया गया, जबकि 2,35,277 मामलों में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी को देखते हुए केंद्रीय मंत्रालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि शेष 2,35,277 लाभार्थियों का एक सप्ताह के भीतर सत्यापन पूरा कर पात्रता नहीं मिलने पर उनके राशन कार्ड निरस्त किए जाएं।
कई मानकों पर होती है जांच
मंत्रालय द्वारा विकसित डिजिटल ऐप आधार कार्ड से जुड़े डेटा के आधार पर अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर रहा है। आधार के बैंक खाते, पैन कार्ड और अन्य सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े होने के कारण पात्रता की जांच पहले की तुलना में अधिक आसान हो गई है। यूपी फूड एंड सिविल सप्लाइज इंस्पेक्टर्स/ऑफिसर्स एसोसिएशन के महामंत्री टी.एन. चौरसिया के अनुसार, प्रदेश में 3,66,03,024 राशन कार्ड हैं, जिनसे 14,66,77,452 यूनिट जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि ऐप छोटी-छोटी विसंगतियां भी पकड़ लेता है। उदाहरण किसी व्यक्ति का नाम किसी कंपनी के बोर्ड में दर्ज है या उसके नाम पर वाहन खरीदा गया है, तो उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर उसकी आय का आकलन बदल सकता है और वह राशन योजना के लिए अपात्र माना जा सकता है।
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