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भारत और मॉरीशस पेट्रोलियम से आगे बढ़कर क्लीन एवं सस्टेनेबल एनर्जी पर करेंगे मिलकर काम

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत और मॉरीशस अपनी एनर्जी पार्टनरशिप को पारंपरिक पेट्रोलियम उत्पादों से आगे बढ़ाकर साफ़ और टिकाऊ ईंधन तक ले जाने के लिए तैयार हैं, मॉरीशस ने इसके लिए एक नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार किया है। पुरी ने कहा कि दोनों देशों के बीच एनर्जी सहयोग में भविष्य की एनर्जी सिक्योरिटी और साफ़ ईंधन भी शामिल होंगे, जो पेट्रोलियम उत्पादों में उनकी मौजूदा पार्टनरशिप को और मज़बूत करेंगे।

पुरी ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा, “भारत-मॉरीशस एनर्जी पार्टनरशिप अब सिर्फ़ आज की ज़रूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की एनर्जी सिक्योरिटी और साफ़ ऊर्जा की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।” पुरी ने बताया कि मॉरीशस ‘ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस’ का संस्थापक सदस्य है और उसने इस अलायंस की मदद से अपना नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार किया है। इससे कच्चे तेल और रिफ़ाइंड पेट्रोलियम उत्पादों से आगे बढ़कर, साफ़ और टिकाऊ ईंधन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बेहतर सहयोग की गुंजाइश बनती है। मंत्री ने कहा कि भारत की बढ़ती रिफ़ाइनिंग क्षमता और रिफ़ाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के नेट एक्सपोर्टर के तौर पर उसकी स्थिति, देश को सहयोगी देशों की एनर्जी सिक्योरिटी में बड़ी भूमिका निभाने में भी मदद कर रही है।

पुरी ने कहा, “भारत की एनर्जी से जुड़ी ताकत अब हमारे दोस्तों के लिए भी ताकत बन गई है।” उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है, भारत अपने सहयोगियों के लिए एक भरोसेमंद और स्थिर एनर्जी स्रोत के तौर पर काम कर सकता है। पुरी के अनुसार, भारत में अभी 23 रिफ़ाइनरियां हैं जो सालाना लगभग 270 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल की प्रोसेसिंग करती हैं। उन्होंने कहा कि देश की रिफ़ाइनिंग क्षमता को बढ़ाया जा रहा है और इसकी रिफ़ाइनिंग क्षमता को सिर्फ़ एक एसेट के तौर पर नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद एनर्जी पार्टनर बने रहने की ज़िम्मेदारी के तौर पर भी देखा जाना चाहिए।

पुरी ने कहा, “भारत की रिफ़ाइनिंग क्षमता अब सिर्फ़ हमारी ताकत नहीं, बल्कि हमारी ज़िम्मेदारी और हमारी ग्लोबल विश्वसनीयता भी है।” उन्होंने कहा कि भारत-मॉरीशस पार्टनरशिप यह दिखाती है कि कैसे भारत की एनर्जी क्षमताएं मित्र देशों की आर्थिक मज़बूती में मदद कर सकती हैं। यह सहयोग मॉरीशस को अपनी एनर्जी सिक्योरिटी मज़बूत करने में मदद करेगा और साथ ही टिकाऊ ईंधन के क्षेत्र में भविष्य के सहयोग के अवसर भी पैदा करेगा। पुरी ने कहा कि हालिया समझौते दोनों देशों के बीच एनर्जी संबंधों में एक बड़े बदलाव का संकेत हैं, जिसमें पार्टनरशिप ईंधन की तत्काल ज़रूरतों को पूरा करने से आगे बढ़कर एनर्जी सिक्योरिटी और साफ़ विकल्पों पर लंबे समय के सहयोग की ओर बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, “ये G2G और B2B समझौते भारत-मॉरीशस एनर्जी सहयोग में एक नए अध्याय की शुरुआत करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि मॉरीशस का नया बायोफ्यूल पॉलिसी फ्रेमवर्क “कच्चे तेल और रिफ़ाइंड उत्पादों से आगे बढ़कर साफ़ और टिकाऊ ईंधन के क्षेत्र में गहरे सहयोग का रास्ता खोलता है।” पुरी ने कहा कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी रिफाइनिंग और ऊर्जा क्षमताओं का इस्तेमाल न केवल घरेलू ज़रूरतों के लिए, बल्कि सहयोगी देशों की ऊर्जा सुरक्षा में मदद करने के लिए भी करना चाहता है।

 

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