दिल्ली के VMMC और सफदरजंग अस्पताल ने कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने एक वयस्क मरीज में दुनिया की पहली रोबोटिक सिस्टमिक एट्रियोवेंट्रिकुलर (AV) वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी को बिना किसी भी परेशानी के सफलतापूर्वक कर दिखाया है। यह ऐतिहासिक ऑपरेशन अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा की निगरानी में किया गया है।
दरअसल, मरीज जन्म से ही दो दुर्लभ हृदय समस्याओं कंजेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज (ccTGA) और डेक्सट्रोकार्डिया से पीड़ित था। CTVS विभाग की विशेषज्ञ टीम ने आधुनिक रोबोटिक तकनीक की मदद से इस जटिल सर्जरी को सफल बनाया।
रोबोटिक तकनीक से इलाज बना आसान
VMMC और सफदरजंग अस्पताल की CTVS (कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी) टीम के लिए यह रोबोटिक सर्जरी आसान नहीं थी। CTVS विभाग के प्रमुख और निदेशक प्रोफेसर डॉ. अनुभव गुप्ता के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने इस कम चीर-फाड़ वाली (मिनिमली इनवेसिव) तकनीक से ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। हालांकि मरीज की हृदय संरचना बेहद जटिल थी, क्योंकि वह जन्म से ही दो दुर्लभ बीमारियों से प्रभावित था।
मरीज कंजेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज (ccTGA) से पीड़ित था। इस स्थिति में दिल के निचले हिस्से यानी वेंट्रिकल्स की बनावट सामान्य से अलग होती है। इसके कारण कमजोर दायां वेंट्रिकल पूरे शरीर में खून पहुंचाने का काम करता है और उस पर ज्यादा दबाव पड़ता है। इसके अलावा मरीज को डेक्सट्रोकार्डिया (Dextrocardia) भी था, जिसमें दिल सामान्य स्थिति के विपरीत छाती के दाईं ओर स्थित होता है। इन दोनों स्थितियों के कारण सर्जरी करना डॉक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती थी।
3D तकनीक से तैयार की गई सर्जरी की योजना
समय के साथ मरीज के सिस्टमिक AV वाल्व में गंभीर लीकेज की समस्या विकसित हो गई थी। इससे दिल की कार्यक्षमता कमजोर होने लगी और हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ गया था। मरीज की जटिल शारीरिक संरचना को समझने और सुरक्षित तरीके से ऑपरेशन की योजना बनाने के लिए CT स्कैन की मदद से दिल का विस्तृत 3D रीकंस्ट्रक्शन तैयार किया गया।
अनोखे तरीके से की गई रोबोटिक सर्जरी
आमतौर पर रोबोटिक माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट छाती के दाईं ओर से किया जाता है लेकिन मरीज को डेक्सट्रोकार्डिया होने के कारण डॉक्टरों ने इस प्रक्रिया में बदलाव किया। टीम ने छाती के बाईं ओर से रोबोटिक सर्जरी करने की नई तकनीक अपनाई, जो इस तरह के मरीज के लिए अधिक उपयुक्त थी।
ऑपरेशन के दौरान मरीज की छाती की हड्डी (ब्रेस्टबोन) को नहीं काटा गया। छोटे-छोटे छेदों के जरिए हाई-डेफिनिशन 3D विजुअल सिस्टम और रोबोटिक आर्म्स की सहायता से बेहद सटीक तरीके से सर्जरी की गई।
मरीज को मिले कई फायदे
इस आधुनिक तकनीक से मरीज को कई लाभ मिलते हैं। इसमें छाती की संरचना सुरक्षित रहती है खून का नुकसान कम होता है और संक्रमण का खतरा भी घट जाता है। इसके अलावा ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है। यह उपलब्धि रोबोटिक कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में भारत की बड़ी सफलता मानी जा रही है।