दिल्ली हाई कोर्ट ने क्रिकेटर युवराज सिंह के ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ की सुरक्षा करते हुए, तीसरे पक्ष द्वारा उनके नाम, तस्वीर आदि के कमर्शियल या पर्सनल फायदे के लिए बिना इजाज़त इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसमें सामान की बिक्री और AI-जनरेटेड या डीपफेक कंटेंट बनाना भी शामिल है। जस्टिस ज्योति सिंह ने खिलाड़ी के केस पर अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि युवराज सबसे सम्मानित, पहचाने जाने वाले और दुनिया भर में मशहूर क्रिकेटरों में से एक हैं, जिन्होंने 17 सालों तक खेल के सभी फॉर्मेट में देश का प्रतिनिधित्व किया है। साथ ही, उनके व्यक्तित्व और प्राइवेसी के अधिकारों का उल्लंघन करने वालों से “सख्ती से निपटा जाना चाहिए”।
व्यक्तित्व और प्राइवेसी के अधिकारों का उल्लंघन
29 जुलाई को जारी आदेश में, जस्टिस सिंह ने ‘युवराज सिंह’ और ‘युवी’ नाम के साथ-साथ क्रिकेटर की तस्वीर, आवाज़, शक्ल-सूरत और व्यक्तित्व से जुड़ी अन्य विशेषताओं के गलत इस्तेमाल या दुरुपयोग से सुरक्षा प्रदान की।
युवराज ने तर्क दिया कि उनके व्यक्तित्व से जुड़ी विशेषताओं वाले सामान की बिना इजाज़त बिक्री के अलावा, कई सोशल मीडिया अकाउंट AI-जनरेटेड तस्वीरें और वीडियो पब्लिश और शेयर कर रहे थे। इनमें उन्हें मनगढ़ंत और काल्पनिक स्थितियों में दिखाया जा रहा था, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और गुडविल को नुकसान पहुँच रहा था।
उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि आपत्तिजनक कंटेंट में धार्मिक रूप से असंवेदनशील पोस्ट, दूसरे क्रिकेटरों के प्रति आक्रामक और हिंसक व्यवहार दिखाने वाले वीडियो, और अश्लील व अपशब्दों वाली भाषा वाले पोस्ट शामिल थे।
बिना इजाज़त इस्तेमाल या दुरुपयोग से बचाने का अधिकार
मेटा प्लेटफॉर्म्स और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का निर्देश देते हुए कोर्ट ने कहा, “इसमें कोई विवाद नहीं हो सकता कि वादी (युवराज) का कद उन्हें स्वाभाविक रूप से उनके व्यक्तित्व और उससे जुड़ी विशेषताओं पर मालिकाना हक देता है। साथ ही, यह उन्हें कमर्शियल उद्देश्यों के लिए व्यक्तित्व की विशेषताओं का इस्तेमाल करने का विशेष अधिकार देता है और नतीजतन, तीसरे पक्ष द्वारा उनके व्यक्तित्व की विभिन्न विशेषताओं के बिना इजाज़त इस्तेमाल या दुरुपयोग से बचाने का अधिकार भी देता है।” कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला, “AI-जनरेटेड पोस्ट और डीपफेक वीडियो का कंटेंट वादी की उस अपार गुडविल और प्रतिष्ठा को धूमिल कर रहा है, जिसे उन्होंने सालों की कड़ी मेहनत और क्रिकेट के मैदान में शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ समाज कल्याण में योगदान से हासिल किया है। साथ ही, यह जनता की नज़र में उनकी छवि और रुतबे को भी कम कर रहा है।”
ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन और सलमान खान जैसे अभिनेता, आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर, पत्रकार सुधीर चौधरी, पॉडकास्टर राज शमानी, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और क्रिकेटर अभिषेक शर्मा जैसी कई मशहूर हस्तियां पहले भी अपने व्यक्तित्व और पब्लिसिटी अधिकारों की सुरक्षा के लिए हाई कोर्ट का रुख कर चुकी हैं। हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी थी।
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