दिल्ली में ट्रैफिक चालान निपटारे से जुड़े विवादित नए नियमों को दिल्ली सरकार ने फिलहाल स्थगित कर दिया है। वकीलों के चौतरफा विरोध और हड़ताल की चेतावनी के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और परिवहन मंत्री डॉ. पंकज सिंह के साथ सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल की हुई अहम बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके साथ ही वकीलों ने 24 सितंबर को आयोजित होने वाले उपराज्यपाल आवास घेराव प्रदर्शन को टाल दिया है। अब चालानों का निपटारा पुरानी व्यवस्था के तहत ही किया जाएगा।
क्या थे 14 सितंबर की अधिसूचना के विवादित प्रावधान
दिल्ली सरकार ने 14 सितंबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के रूल 167 में संशोधन कर नई अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत कोर्ट जाने से पहले 14 विभागों के नामित अधिकारियों को ऑनलाइन आपत्तियां सुनने का अधिकार दिया गया था। सबसे ज्यादा विवाद कोर्ट जाने से पहले 50 प्रतिशत चालान फीस अग्रिम जमा कराने की शर्त पर हुआ। इसके अलावा, चालान निपटाने या चुनौती देने के लिए 45 दिन की सख्त समय सीमा तय की गई थी, जिसके बीतने पर आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी सेवाएं ब्लॉक करने का प्रावधान था। वहीं, साल में 5 से ज्यादा चालान पर लाइसेंस रद्द करने का नियम भी शामिल था।
वकीलों ने क्यों उठाया न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल
वकीलों की समन्वय समिति ने इन बदलावों को न्यायपालिका के अधिकारों का हनन बताया। उनका कहना था कि चालान सही है या गलत, इसका फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट ही कर सकता है, न कि कोई प्रशासनिक अधिकारी। वकीलों का तर्क था कि चालान की आधी फीस पहले जमा कराने का नियम आर्थिक रूप से कमजोर चालकों को न्याय से वंचित कर देगा, क्योंकि वे इतनी बड़ी रकम तुरंत जमा करने में असमर्थ होंगे।
समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा अंतिम फैसला
परिवहन मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि वकीलों द्वारा दिए गए मांग पत्र पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। जब तक सभी आपत्तियों की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती और आम सहमति नहीं बन जाती, तब तक नए नियम लागू नहीं होंगे। सरकार आपत्तियों की समीक्षा करने के बाद ही आगे की रूपरेखा तैयार करेगी।
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