पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। बठिंडा में आयोजित एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को सार्वजनिक रूप से घेरने की कोशिश की। कार्यक्रम के दौरान जब कुछ समर्थक चरणजीत चन्नी के समर्थन में नारे लगा रहे थे, तो वड़िंग ने एक समर्थक को मंच पर बुला लिया और उससे चन्नी तथा कांग्रेस पार्टी के पक्ष में नारे लगवाए। इसके बाद वड़िंग ने उसी समर्थक से चन्नी को फोन लगवाया और कॉल का स्पीकर ऑन कर माइक के पास कर दिया। हालांकि, चरणजीत सिंह चन्नी ने फोन रिसीव नहीं किया, जिस पर वड़िंग ने तंज कसते हुए कहा कि चन्नी व्यस्त होंगे। इस पूरी कवायद के जरिए वड़िंग यह साबित करने की कोशिश कर रहे थे कि चन्नी अपने समर्थकों के फोन तक नहीं उठाते हैं।
भूपेश बघेल के दौरे से पहले लगे विरोध में पोस्टर
दूसरी ओर, पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दौरे से ठीक पहले बठिंडा और मुक्तसर में उनके खिलाफ तीखा विरोध देखने को मिला। राजा वड़िंग के गृह जिले मुक्तसर में सड़कों पर लगे पोस्टरों में भूपेश बघेल की तुलना ब्रिटिश शासन के अधिकारी जनरल डायर से करते हुए ‘गो बैक बघेल’ के नारे लिखे गए। इसके अलावा, पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में भी कई जगह पोस्टर चस्पा किए गए, जिन पर ‘राजा-बघेल हटाओ, कांग्रेस बचाओ’ जैसे नारे लिखे हुए थे। इन विरोध प्रदर्शनों और पोस्टरों ने पार्टी के भीतर मचे घमासान को और हवा दे दी है।
बलकौर सिंह ने राजा वड़िंग पर बोला करारा हमला
दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने भी प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के एक पुराने बयान पर खुलकर पलटवार किया है। राजा वड़िंग द्वारा सिद्धू मूसेवाला की 63 हजार वोटों से हार का बार-बार जिक्र किए जाने पर बलकौर सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने मंच से कहा कि उस चुनाव में सिद्धू के अलावा खुद अमृता वड़िंग समेत कई बड़े दिग्गज भी हारे थे, लेकिन वड़िंग कभी उनका जिक्र नहीं करते। बलकौर सिंह ने आरोप लगाया कि राजा वड़िंग की कार्यशैली की वजह से पार्टी में गुटबाजी बढ़ रही है और वे हर हलके में चार-चार विधायक खड़े कर आपसी कलह को बढ़ावा दे रहे हैं।
चन्नी की हाईकमान से बढ़ती दूरियां और सियासी अटकलें
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की पार्टी हाईकमान से बढ़ती दूरियों को लेकर भी सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। हाल ही में दिल्ली की बैठकों में कैंपेन कमेटी के चेयरमैन पद को लेकर चन्नी के तेवर तीखे रहे थे और उन्होंने इस्तीफा तक देने की बात कही थी। इसके अलावा, पार्टी द्वारा निष्कासित किए गए नेता मदनलाल जलालपुर से मिलने उनके घर पहुंचना और वड़िंग-बघेल के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखना यह संकेत देता है कि पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री रहे चन्नी का पार्टी नेतृत्व से मोहभंग हो रहा है। पटियाला और समाना जैसे इलाकों में चन्नी समर्थकों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन और हूटिंग करने से पार्टी की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं।
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