Crude Oil Exploration: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। इसी लक्ष्य के तहत केंद्र सरकार ने नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन योजना ‘समुद्र मंथन’ को मंजूरी दी है। इस योजना पर 84,084 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह निवेश वित्त वर्ष 2030-31 तक किया जाएगा, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्री क्षेत्रों में घरेलू तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को बढ़ावा देकर देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
क्या है ‘समुद्र मंथन’ योजना?
‘समुद्र मंथन’ एक लॉन्ग टर्म प्रोग्राम है, जिसके तहत समुद्र के नीचे मौजूद उन क्षेत्रों की खोज की जाएगी, जहां तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार होने की संभावना है, लेकिन अब तक वहां व्यापक स्तर पर खोज नहीं हो सकी है। सरकार के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण से प्रेरित है, जिसका जिक्र उन्होंने 2025 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में किया था। उस दौरान उन्होंने भारत की ऊर्जा क्षमता को सामने लाने के लिए आधुनिक युग के ‘समुद्र मंथन’ की बात कही थी।
क्यों जरूरी है यह मिशन?
वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 88-89% कच्चा तेल और करीब आधी प्राकृतिक गैस आयात करता है। बढ़ती ऊर्जा मांग और वैश्विक जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर तेल और गैस के नए स्रोत तलाशना देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए बेहद जरूरी है।
योजना के तहत क्या होगा?
भारत के कई ऑफशोर सेडिमेंट्री बेसिन ऐसे हैं, जहां तेल और प्राकृतिक गैस मिलने की संभावना है, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अधिक लागत के कारण इन क्षेत्रों में अब तक ठीक से खोज नहीं हो पाई है। इस योजना के तहत सरकार बड़े पैमाने पर समुद्री सर्वेक्षण, भूवैज्ञानिक अध्ययन, वैज्ञानिक ड्रिलिंग और जरुरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तीय सहायता देगी। साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले भूवैज्ञानिक डेटा तैयार किए जाएंगे, जिससे संभावित हाइड्रोकार्बन संसाधनों की सटीक पहचान कर तेल और गैस के दोहन का मार्ग प्रशस्त हो सके।
आधुनिक तकनीक से होगी गहरे समुद्र में खोज
‘समुद्र मंथन’ मिशन के तहत अत्याधुनिक तकनीक की मदद से उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां तेल और गैस मिलने की संभावना अधिक है। इसके बाद गहरे और अति-गहरे समुद्री इलाकों में ड्रिलिंग की जाएगी। योजना में सीमावर्ती क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, सामान्य उत्पादन और निकासी, तेल एवं गैस विनिर्माण, सेवा क्षेत्र का विकास, आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रोग्राम मैनेजमेंट और क्षमता निर्माण जैसे कई अहम पहलू भी शामिल किए गए हैं।
देश को क्या होगा फायदा?
सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से भविष्य में 600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल समतुल्य ऊर्जा भंडार जुड़ सकते हैं। हालांकि व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने में अभी कई साल लग सकते हैं, लेकिन सफल खोजों से देश की तेल और गैस आयात पर निर्भरता कम होगी। इसके अलावा ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, घरेलू और विदेशी निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत की ऊर्जा क्षमता को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।
Read More:
44 लाख के बीमा के लिए पत्नी की हत्या, पति समेत 4 लोग गिरफ्तार, करीब दो पहले हुई थी लव मैरिज

