दिल्ली-उत्तर प्रदेश रेल मार्ग पर यात्री दबाव और बढ़ते ट्रैफिक को कम करने के लिए रेलवे प्रशासन ने गाजियाबाद-मुरादाबाद, मुरादाबाद-रोजा और रोजा-सीतापुर के बीच कुल 402.78 किलोमीटर लंबे मार्ग पर तीसरी और चौथी रेलवे लाइन बिछाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के 46 गांवों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण सीधे रेलवे बोर्ड द्वारा किया जाएगा। जमीन के बदले प्रभावित किसानों को भारी-भरकम मुआवजा दिए जाने की उम्मीद है।
तीन तहसीलों के 46 गांव
इस रेल विस्तार परियोजना के दायरे में अमरोहा जिले की तीन प्रमुख तहसीलें आ रही हैं। इसमें सबसे अधिक प्रभाव अमरोहा तहसील पर पड़ेगा, जहां के 27 गांवों का कुल 48.1182 हेक्टेयर रकबा अधिग्रहित होगा। वहीं, धनौरा तहसील के 14 गांवों की 12.487 हेक्टेयर जमीन और हसनपुर तहसील के 5 गांवों का 10.787 हेक्टेयर रकबा इस प्रोजेक्ट में शामिल है। प्रशासन ने अधिग्रहीत होने वाले क्षेत्र का सर्वे और गाटावार सीमांकन शुरू कर दिया है।
जमीनों की खरीद-बिक्री और धारा-80 पर सख्त पाबंदी
परियोजना में किसी भी प्रकार के हेरफेर, अनधिकृत निर्माण या कानूनी अड़चनों को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम उठाए गए हैं। अमरोहा, धनौरा और हसनपुर तहसीलों के उपजिलाधिकारियों (SDM) और सब-रजिस्ट्रार को निर्देश देकर प्रभावित गांवों के चिन्हित गाटा नंबरों की जमीन के क्रय-विक्रय (खरीद-बेच) तथा गैर-कृषि परिवर्तन (धारा-80) पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
प्रशासन ने रेलवे से मांगा जमीनों का पूरा ब्योरा
विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कर्मेंद्र सिंह के अनुसार, अधिग्रहित क्षेत्र में खरीद-फरोख्त रोकने के लिए सभी संबंधित एसडीएम को आधिकारिक पत्र भेजा जा चुका है। इसके साथ ही रेलवे अधिकारियों से किसानों की अधिग्रहित जमीनों का गाटा संख्या सहित विस्तृत ब्योरा मांगा गया है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि किस किसान का कितना रकबा प्रोजेक्ट की जद में आ रहा है। ब्योरा मिलते ही मुआवजा वितरण और अधिग्रहण की अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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