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माता-पिता बेचते थे सब्जी, लालटेन की रोशनी में पढ़कर बने IPS… 20 लाख का ऑफर ठुकराकर चुना देश सेवा का रास्ता

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले शरण गोपीनाथ कांबले ने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के बल पर एक मिसाल कायम की है। दैनिक मजदूर और सब्जी बेचने वाले माता-पिता के बेटे शरण ने लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करके भारतीय पुलिस सेवा (IPS) तक का सफर तय किया। राजस्थान कैडर के 2021 बैच के इस युवा अधिकारी को ड्रग्स और नशा तस्करी के खिलाफ चलाए गए उनके प्रभावी अभियानों के लिए हाल ही में गणतंत्र दिवस पर प्रतिष्ठित ‘डीजीपी डिस्क’ (DGP Disc) से सम्मानित किया गया है।

20 लाख का पैकेज ठुकराकर सिविल सेवाओं में मारी बाजी

शरण गोपीनाथ कांबले की उच्च शिक्षा की यात्रा भी उपलब्धियों से भरी रही है। वालचंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, सांगली से बीटेक करने के बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IISc बेंगलुरु से एमटेक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें निजी क्षेत्र से करीब 20 लाख रुपये सालाना का आकर्षक जॉब ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने कॉर्पोरेट करियर के बजाय जनसेवा के पथ को चुना। दिल्ली आकर यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्हें महाराष्ट्र सरकार से आठ महीने तक 12,000 रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति मिली।

एक के बाद एक कई प्रतियोगी परीक्षाओं में फहराया परचम

उनकी लगन का ही परिणाम था कि शरण ने एक साथ कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परीक्षाओं में सफलता का परचम लहराया। साल 2019 में उन्होंने यूपीएससी CAPF (सहायक कमांडेंट) परीक्षा में पूरे देश में 8वीं रैंक हासिल की। इसके बाद यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2020 में 542वीं रैंक प्राप्त कर वे आईपीएस अधिकारी बने। उन्होंने भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में भी 127वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन उन्होंने पुलिस सेवा को ही अपने करियर के रूप में चुना।

ड्रग नेटवर्क पर शिकंजा और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान

राजस्थान के जालौर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र सांचौर में एसीपी के रूप में अपनी पहली तैनाती के दौरान शरण कांबले ने नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी पर कड़ा प्रहार किया। संगठित ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करने के साथ-साथ उन्होंने शादियों और स्थानीय आयोजनों में अफीम व डोडा पोस्त परोसने जैसी परंपराओं के खिलाफ व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया। सीमित संसाधनों और अभावों के बीच पली-बढ़ी उनकी यह यात्रा आज देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

 

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