देश के कई हिस्सों में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। केरल और गुजरात में बारिश ने सबसे ज्यादा असर डाला है, जहां कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। वहीं असम में भी बाढ़ का संकट पूरी तरह टला नहीं है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है।
केरल में भारी बारिश से 6 की मौत
केरल में लगातार हो रही बारिश से हालात गंभीर बने हुए हैं। बारिश से जुड़े हादसों में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित लोगों की सहायता के लिए राज्यभर में 65 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां 1,400 से अधिक लोगों को ठहराया गया है। भारी बारिश और संभावित भूस्खलन के खतरे को देखते हुए त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड और पथानामथिट्टा जिला प्रशासन ने 2 और 3 अगस्त को ‘निरापुथरी’ पर्व के दौरान सबरीमाला जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से यात्रा से पहले मौसम की स्थिति पर नजर रखने की अपील की है। पंपा नदी का जलस्तर बढ़ने और भूस्खलन की आशंका के बीच पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड समेत 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
गुजरात और असम में राहत अभियान जारी
गुजरात में भी भारी बारिश के कारण कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने अहमदाबाद, सुरेंद्रनगर, राजकोट, भावनगर, मोरबी और बोटाद जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने हालात को देखते हुए कई जिलों में अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। NDRF और SDRF की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में लगी हैं। सूरत, नवसारी और अन्य प्रभावित इलाकों से अब तक करीब 27 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। उधर, असम में बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 1.78 लाख रह गई है, जबकि बाढ़ प्रभावित जिलों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। पिछले 24 घंटों में किसी नई मौत की सूचना नहीं मिली है। बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या 82 बनी हुई है। शिवसागर, गोलाघाट, चराइदेव, बाजाली, धेमाजी, सोनितपुर और जोरहाट अब भी प्रभावित हैं। फिलहाल 218 राहत शिविरों में 71,889 लोग रह रहे हैं, जबकि 1,811 राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध कराई जा रही है।
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