अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों का हवाला देते हुए चीन में बने हुए नए ह्यूमनॉइड रोबोट के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इस कदम के बाद चीन ने कड़ी रिएक्शन देते हुए कहा कि वाशिंगटन सुरक्षा के नाम पर चीनी कंपनियों को वैश्विक बाजार से बाहर करने की कोशिश कर रहा है। बीजिंग ने साफ किया कि वह अपने उद्योगों और कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी जवाबी कदम उठाएगा।
रोबोटिक्स उद्योग में चीन का तेजी से बढ़ता दबदबा
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स (IFR) के अनुसार, 2024 में दुनिया भर में लगाए गए इंडस्ट्रियल रोबोट में 54% हिस्सेदारी अकेले चीन की रही। इसी वर्ष चीन ने लगभग 2.95 लाख इंडस्ट्रियल रोबोट स्थापित किए। फिलहाल चीनी फैक्ट्रियों में 20 लाख से अधिक रोबोट काम कर रहे हैं। घरेलू कंपनियों की स्थिति भी लगातार मजबूत हुई है। 2024 में चीन के इंडस्ट्रियल रोबोट बाजार में 57% बिक्री स्थानीय कंपनियों की रही, जबकि करीब दस साल पहले यह आंकड़ा लगभग 28% था। ह्यूमनॉइड रोबोट के क्षेत्र में भी चीन अग्रणी माना जा रहा है। 2024 में दुनिया में तैनात किए गए ह्यूमनॉइड रोबोट में लगभग 85% चीन के थे। जबकि 2025 में वैश्विक स्तर पर भेजे गए करीब 90% ह्यूमनॉइड रोबोट चीनी कंपनियों ने बनाए।
इनोवेशन ने बढ़ाई चीन की बढ़त
विशेषज्ञों के अनुसार, ह्यूमनॉइड रोबोट तैयार करने के लिए बैटरी, इलेक्ट्रिक मोटर, कैमरे, सेंसर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तकनीक की जरूरत होती है। इन सभी क्षेत्रों में चीन पहले से मजबूत स्थिति में है। स्मार्टफोन, ड्रोन, सोलर उपकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विकसित उसकी विशाल सप्लाई चेन का लाभ अब रोबोटिक्स उद्योग को भी मिल रहा है। शेनझेन और हांगझोउ जैसे शहरों में कंपनियां तेजी से नए मॉडल विकसित कर बड़े पैमाने पर उनका उत्पादन कर रही हैं।
चीन में इस समय 140 से अधिक कंपनियां ह्यूमनॉइड रोबोट बना रही हैं और यह क्षेत्र देश की राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बन चुका है। हालिया रिपोर्ट में पेटेंट क्षमता के आधार पर दुनिया के शीर्ष 10 ह्यूमनॉइड रोबोट स्टार्टअप में 6 चीन के बताए गए हैं, जबकि टॉप-5 में भी चीनी कंपनियों का दबदबा है।
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