सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। सोमवार, 20 जुलाई को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 502 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,215 के स्तर से नीचे आ गया। कारोबार की शुरुआत से ही अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिसमें बैंकिंग, आईटी और ऑटो शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।
गिरावट की मुख्य वजह
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों की धारणा पर कई वैश्विक कारकों का असर पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से निवेशकों की चिंता और गहरी हो गई है। विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भी घरेलू शेयर बाजार पर देखने को मिला, जिसके चलते कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली हावी रही।
बैंकिंग शेयरों में सबसे अधिक दबाव
सोमवार के कारोबार में बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। कुछ प्रमुख बैंकों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे बाजार की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके, जिसके बाद निवेशकों ने बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसका असर प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर साफ दिखाई दिया। आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जिससे बाजार की गिरावट और गहरी हो गई।
महंगे कच्चे तेल और रुपये की कमजोरी से बढ़ी चिंता
ब्रेंट क्रूड का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से भारतीय बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। इसके अलावा रुपये में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, जिसका असर शेयर बाजार में बिकवाली के रूप में देखने को मिलता है।
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