राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सोमवार को रियाद में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से मुलाकात की। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई, जिसमें “ऊर्जा सुरक्षा” और “समुद्री रास्तों” की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और क्षेत्रीय शिपिंग रूट व ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट की चिंताओं के कारण पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है।
NSA Ajit Doval paid an official visit to Riyadh on 20 July. He was warmly received at the airport by Dr. Saud Al-Sati, Deputy Minister for Political Affairs, and Ambassador Dr. Suhel Khan. During the visit, the NSA met Prince Abdulaziz bin Salman, Minister of Energy; Prince… pic.twitter.com/k6uGobOegn
— ANI (@ANI) July 21, 2026
सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और भारत व सऊदी अरब के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।
मंत्रालय ने ‘X’ पर पोस्ट किया, “उन्होंने हाल की क्षेत्रीय घटनाओं और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने व समुद्री रास्तों की सुरक्षा के प्रयासों पर भी चर्चा की।” इस साल डोभाल का सऊदी अरब का यह तीसरा दौरा था। बैठक में सऊदी के राजनीतिक मामलों के उप-मंत्री सऊद अल-साती भी शामिल हुए।
क्षेत्रीय तनाव से समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ीं
डोभाल का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब यमन के ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ “समुद्री नाकेबंदी” की घोषणा के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। हूथियों का दावा है कि वे बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सऊदी जहाजों को रोकेंगे। उनका यह कदम यमन के हूथी-नियंत्रित इलाकों में बंदरगाहों और हवाई अड्डों की रियाद द्वारा की गई नाकेबंदी के जवाब में है। सऊदी अरब ने इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
इस घटनाक्रम ने प्रमुख वैश्विक शिपिंग रूट की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, खासकर इसलिए क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले यातायात में पहले से ही रुकावट आ रही है।
खाड़ी देशों के सहयोगियों के साथ भारत के संबंध और मजबूत हुए
डोभाल इससे पहले फरवरी और अप्रैल में रियाद गए थे, जब उन्होंने प्रिंस फैसल, सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसाद बिन मोहम्मद अल-ऐबान के साथ बातचीत की थी।
भारत और सऊदी अरब के बीच मजबूत रणनीतिक, ऊर्जा और आर्थिक संबंध हैं। लगभग 26 लाख भारतीय इस देश में रहते हैं और काम करते हैं, जो वहां का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। सऊदी अरब भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाले प्रमुख देशों में से एक है।
डोभाल का यह हालिया दौरा खाड़ी देशों के साथ भारत के लगातार राजनयिक जुड़ाव को दर्शाता है। नई दिल्ली का मकसद क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना, महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भारतीय नागरिकों व नाविकों की सुरक्षा बनाए रखना है।
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