एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में 1985 में हुए बम धमाके की जांच को लेकर कनाडा में नया विवाद हो गया है। पीड़ित परिवारों का दावा है कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) अपनी एयर इंडिया टास्क फोर्स का आकार घटाने और जांच को ‘इनएक्टिव’ श्रेणी में रखने पर विचार कर रही है। इस मुद्दे को लेकर कनिष्क फाउंडेशन के चेयरमैन और पीड़ित परिवार के सदस्य संजय लाजर ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को पत्र लिखकर चिंता जताई है।
परिवारों को जांच बंद होने का डर
23 जून 1985 को मॉन्ट्रियल से लंदन जा रही फ्लाइट 182 में आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर बम विस्फोट हुआ था। विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें 268 कनाडाई नागरिक थे। कनाडाई अधिकारियों ने इसे देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला बताया है। इसी साजिश से जुड़ा एक दूसरा बम जापान के नारिता एयरपोर्ट पर भी फटा था, जिसमें सामान संभालने वाले दो कर्मचारियों की जान गई थी। दोनों घटनाओं की जांच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई। कनाडा में बाद में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जॉन मेजर की अध्यक्षता में सार्वजनिक जांच भी हुई, जिसमें सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था से जुड़ी कमियों की पड़ताल की गई।
टोरंटो बैठक के बाद लाजर ने PM कार्नी को लिखा पत्र
संजय लाजर के मुताबिक, 12 सितंबर को टोरंटो में RCMP अधिकारियों और पीड़ित परिवारों के बीच बैठक हुई थी। उनका दावा है कि बैठक में एयर इंडिया टास्क फोर्स में कटौती और जांच को निष्क्रिय स्थिति में डालने की संभावना बताई गई। लाजर ने 16 सितंबर को मार्क कार्नी को लिखे पत्र में इस पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने बताया कि 23 जून 1985 की घटना में उन्होंने अपने माता-पिता और छोटी बहन को खो दिया था। लाजर का कहना है कि परिवार जांच को बिना ठोस आधार के बंद करने के खिलाफ हैं। उनका तर्क है कि जांच समाप्त करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी उचित सुराग और जांच के रास्ते आजमाए जा चुके हों। परिवारों ने सबूतों के गायब होने, निगरानी रिकॉर्डिंग डिलीट होने और गवाहों की मौत या धमकियों जैसी समस्याओं का भी जिक्र किया है। इन दावों को परिवारों की ओर से उठाई गई चिंताओं के रूप में देखा जाना चाहिए।
2025 की समीक्षा में RCMP ने बताई थी जांच की जटिलता
2025 में हमले की 40वीं बरसी पर RCMP की ओर से जारी समीक्षा में बताया गया था कि मामले की जांच में सैकड़ों अधिकारी शामिल रहे। जांचकर्ताओं ने कई देशों की यात्रा की, सबूत जुटाए, विमान का पुनर्निर्माण किया और गवाहों से पूछताछ की थी। लाजर ने अपने पत्र की प्रतियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भारत और कनाडा के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी हैं। उन्होंने यह सवाल उठाया है कि चार दशक से अधिक समय बाद जांच की दिशा क्या होनी चाहिए। जून 2026 में 41वीं बरसी पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी 329 पीड़ितों को याद करते हुए फ्लाइट 182 को कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला बताया था। ऐसे में RCMP की जांच को लेकर उठी नई चर्चा ने इस पुराने मामले को एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
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