टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही टाटा ग्रुप के साथ उनके करीब चार दशक लंबे सफर का भी अंत होने जा रहा है। चंद्रशेखरन ने यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की वार्षिक आम बैठक (AGM) से पहले लिया है।
टाटा ग्रुप का नेतृत्व करना सम्मान की बात – चंद्रशेखरन
इस्तीफे देने एन चंद्रशेखरन ने कहा कि उन्होंने टाटा संस बोर्ड को अपने पद से हटने के फैसले की जानकारी दे दी है। उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप में 40 साल पूरे करना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा और पिछले करीब एक दशक तक टाटा संस का नेतृत्व करना उनके लिए बड़े सम्मान की बात रही है। चंद्रशेखरन के इस्तीफे के साथ अब टाटा संस के अगले चेयरमैन को लेकर उत्तराधिकार प्रक्रिया शुरू होगी। उनकी दोबारा नियुक्ति को लेकर पिछले कुछ महीनों से मतभेद की खबरें सामने आती रही थीं।
इंटर्न से टाटा संस के चेयरमैन तक का सफर
एन चंद्रशेखरन ने 1987 में टाटा ग्रुप की कंपनी TCS में इंटर्न के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। अपनी योग्यता और लगातार तरक्की के दम पर उन्होंने 2007 में TCS के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर का पद संभाला और 2009 में कंपनी के CEO बने।
2017 में साइरस मिस्त्री के टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने के बाद चंद्रशेखरन को समूह की कमान सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर करीब एक दशक तक समूह का नेतृत्व किया।
एयर इंडिया अधिग्रहण से सेमीकंडक्टर तक बड़ा विस्तार
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने कई बड़े क्षेत्रों में विस्तार किया। एयर इंडिया का अधिग्रहण समूह की सबसे बड़ी रणनीतिक उपलब्धियों में शामिल रहा। इसके अलावा टाटा मोटर्स और टाटा डिजिटल को आगे बढ़ाने के साथ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी समूह ने निवेश बढ़ाया। उनके नेतृत्व में समूह की वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ और कर्ज कम करने पर जोर दिया गया। टाटा ग्रुप का राजस्व भी उनके कार्यकाल में दो गुने से अधिक बढ़ा।
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