प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने करीब 336 करोड़ रुपये के कथित क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी(ED Crypto Fraud) मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की है। यह कार्रवाई दक्षिण अंडमान के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई जो एक डच नागरिक की शिकायत पर दर्ज हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर बड़ी रकम लेकर वादे के अनुसार डिजिटल टोकन उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी मामले को आधार बनाकर ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज किया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने विदेशी निवेशकों से करोड़ों डॉलर का निवेश प्राप्त किया लेकिन तय समय पर उन्हें डिजिटल टोकन नहीं सौंपे। जब संबंधित टोकनों की बाजार कीमत बढ़ी तब निवेशकों को टोकन देने से इनकार कर दिया गया। शुरुआती जांच में इस कथित धोखाधड़ी की राशि लगभग 35 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 336 करोड़ रुपये) आंकी गई है, जो शुरुआती एफआईआर में बताई गई रकम से कहीं अधिक है।
बेंगलुरु में मिले कई डिजिटल रिकॉर्ड मिले
ED की बेंगलुरु इकाई ने 18 और 19 जुलाई को कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान निवेश से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और क्रिप्टो लेनदेन की जानकारी जुटाई गई। एजेंसी का कहना है कि जांच में बेंगलुरु निवासी रविंद्र के. तक निवेश की रकम पहुंचने के संकेत मिले हैं और उसे इस मामले का मुख्य आरोपी माना जा रहा है।
87,000 USDT जब्त, जांच जारी
जांच के दौरान ED ने करीब 87,000 USDT (टेदर) क्रिप्टोकरेंसी भी जब्त की है। एजेंसी अब जब्त किए गए डिजिटल एसेट, बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट्स की फॉरेंसिक जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस कथित धोखाधड़ी का शिकार केवल एक डच नागरिक ही नहीं बल्कि कई अन्य विदेशी निवेशक भी हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।