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26 घंटे की थकाऊ दूरी होगी आधी, दिसंबर से अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरेंगी गाड़ियां

देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को नई रफ्तार देते हुए अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। लगभग 80,000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह 6-लेन का ग्रीनफील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर पूरा होने के बाद पंजाब से गुजरात के बीच यात्रा के समय को आधा कर देगा। वर्तमान में पुराने रास्ते से अमृतसर से जामनगर पहुंचने में जहां करीब 26 घंटे का समय लगता है, वहीं इस नए एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह दूरी महज 13 घंटे में तय की जा सकेगी।

चार राज्यों से होकर गुजरेगा नया कॉरिडोर

भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 1316 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात को आपस में सीधे जोड़ेगा। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में दोनों शहरों के बीच की सड़क दूरी लगभग 1430 किलोमीटर है, जो पुराने दो-लेन के रास्तों और भारी ट्रैफिक के कारण काफी थकाऊ साबित होती है। नया कॉरिडोर पंजाब के कपूरथला जिले के टिब्बा गांव से शुरू होकर गुजरात में जामनगर स्थित रिफाइनरी परिसर तक जाएगा।

राजस्थान में होगा सबसे लंबा रूट

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है, जहां इसकी कुल लंबाई लगभग 637 किलोमीटर है। राजस्थान में हनुमानगढ़ से जालोर तक का मुख्य खंड पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है, जिससे राज्य के भीतर अंतर-जिला आवाजाही काफी सुगम हो गई है। परियोजना से जुड़े चारों राज्यों के कई प्रमुख कृषि और औद्योगिक शहर इस नेटवर्क से सीधे कनेक्ट होंगे:

  • पंजाब: अमृतसर, कपूरथला, मोगा, फरीदकोट और बठिंडा

  • हरियाणा: मंडी डबवाली और चौटाला क्षेत्र

  • राजस्थान: हनुमानगढ़, सूरतगढ़, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर और जालोर

  • गुजरात: संतलपुर, राधनपुर, सामख्याली, मालिया और जामनगर

दिसंबर 2026 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य

वर्तमान में इस विशाल प्रोजेक्ट का लगभग 85 से 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। फिलहाल पंजाब और गुजरात के शेष हिस्सों में तेजी से फिनिशिंग का काम चल रहा है। निर्माण एजेंसियों का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक पूरे कॉरिडोर को यातायात के लिए पूरी तरह से खोलने का है, हालांकि अंतिम समयसीमा शेष निर्माण प्रगति और प्रशासनिक स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी।

व्यापार और लॉजिस्टिक्स को मिलेगी नई दिशा

यह एक्सप्रेसवे केवल आम यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि देश के व्यापार और माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) क्षेत्र के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा। इसके चालू होने से उत्तर भारत का समृद्ध कृषि क्षेत्र सीधे पश्चिमी तट और गुजरात के प्रमुख बंदरगाहों से जुड़ जाएगा। इससे फसलों, औद्योगिक सामानों और कच्चे माल को बंदरगाहों तक पहुंचाने में लगने वाले समय और लागत दोनों में भारी कमी आएगी।

 

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