देश के चर्चित निठारी हत्याकांड में बरी हो चुके मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने उत्तराखंड के हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच शुरू कर दी।
चाय की दुकान चलाकर गुजर-बसर कर रहा था कोली
सुरेंद्र कोली हरिद्वार शहर कोतवाली क्षेत्र के भूपतवाला इलाके में रह रहा था और पिछले कुछ समय से वहीं एक चाय की दुकान चलाकर अपना जीवनयापन कर रहा था। इसी चाय की दुकान के भीतर उसने ऊपर रस्सी बांधकर फांसी लगा ली।
पहचान पत्र से हुई आधिकारिक पुष्टि
हरिद्वार शहर कोतवाली के एसएचओ (SHO) कुंदन सिंह राणा ने बताया कि सुबह करीब 11:30 बजे पुलिस को घटना की सूचना मिली थी। पुलिस टीम ने जब मौके पर पहुंचकर मृतक की आईडी और दस्तावेजों की जांच की, तो उसकी पहचान निठारी कांड से जुड़े सुरेंद्र कोली के रूप में हुई। पुलिस अब उन सभी परिस्थितियों की गहराई से पड़ताल कर रही है, जिनके चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
सुप्रीम कोर्ट से मिला था बरी होने का फैसला
निठारी कांड से जुड़े अंतिम मामले में भी सुरेंद्र कोली को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिल चुकी थी। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट कहा था कि निचली अदालतों द्वारा कोली को दोषी ठहराने के लिए इस्तेमाल किए गए सबूत अवैध, अविश्वसनीय और विरोधाभासी थे, जो कानूनी मापदंडों पर बिल्कुल खरे नहीं उतरते थे।
दहला देने वाला था निठारी का पूरा मामला
वर्ष 2005 और 2006 के दौरान नोएडा के निठारी गांव से कई बच्चे और महिलाएं अचानक लापता हो गए थे। जांच के दौरान 29 दिसंबर 2006 को पुलिस सेक्टर-31 स्थित कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की डी-5 कोठी तक पहुंची। कोठी के पीछे बने नाले से पुलिस को दर्जनों मानव खोपड़ियां, कंकाल, हड्डियां और कपड़े बरामद हुए थे। इसके बाद पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया था। बाद में जनवरी 2007 में मामला सीबीआई को सौंपा गया, जिसने 16 मामलों में चार्जशीट दाखिल की थी। कोली पर हत्या, दुष्कर्म और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
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