दिग्गज टेक कंपनी एप्पल भारत में अपनी डिजिटल वॉलेट और कॉन्टैक्टलेस भुगतान सेवा ‘एप्पल पे’ को अगले महीने से शुरू करने की तैयारी में है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी शुरुआत में एक साथ कई बैंकों के बजाय केवल एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को यह सुविधा प्रदान करेगी। क्रेडिट कार्ड जारी करने के मामले में एक्सिस बैंक देश का चौथा सबसे बड़ा बैंक है। एप्पल की योजना समय के साथ अन्य भारतीय वित्तीय संस्थानों और बैंकों को भी इस सेवा से जोड़ने की है।
लंबे समय से था इंतजार
तकनीकी नियमों, सरकारी स्वीकृतियों और बैंकों की शुल्क दरों (बैंक रेट्स) से जुड़े मुद्दों के कारण भारत में एप्पल पे की शुरुआत में काफी समय लगा है। हालांकि, अब ऐसा लगता है कि कंपनी ने इन सभी समस्याओं को सुलझा लिया है। एप्पल का भारत में तेजी से विस्तार हो रहा है, जहां कंपनी ने अपनी रिटेल दुकानों और सेवाओं की मौजूदगी को काफी मजबूत किया है। ऐसे समय में एप्पल पे का आगमन भारतीय डिजिटल भुगतान बाजार के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
बाजार के लिए क्यों है यह खास?
दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत में यूपीआई (UPI) आधारित भुगतान प्रणालियों का दबदबा है। ऐसे मजबूत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में एप्पल पे की एंट्री यह देखने का एक दिलचस्प परीक्षण होगी कि यह सेवा भारत की मौजूदा व्यवस्था के साथ कैसे तालमेल बिठाती है। भारत अब तक उन गिने-चुने बड़े वैश्विक बाजारों में शामिल था, जहां एप्पल पे सेवा उपलब्ध नहीं थी।
सुरक्षित और आसान भुगतान सुविधा
एप्पल पे एक डिजिटल वॉलेट और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट सर्विस है। यह उपयोगकर्ताओं को अपने आईफोन, एप्पल वॉच, आईपैड या मैक डिवाइस के जरिए बिना किसी भौतिक (फिजिकल) कार्ड के दुकानों, ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भुगतान करने की सुविधा देती है। यह तकनीक डिवाइस पर यूजर के डेबिट और क्रेडिट कार्ड का टोकनाइज्ड (सांकेतिक) रूप सुरक्षित रखती है। लेनदेन के दौरान मूल कार्ड नंबर साझा करने के बजाय फेस आईडी, टच आईडी या पासकोड से प्रमाणीकरण किया जाता है।
वैश्विक स्तर पर एप्पल पे की पहुंच
वर्तमान में एप्पल पे दुनिया के 90 से अधिक देशों और क्षेत्रों में काम कर रहा है। इसमें उत्तर अमेरिका, यूरोप, एशिया-पैसिफिक, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्र शामिल हैं। खुदरा भुगतानों के अलावा यह पीयर-टू-पीयर ट्रांसफर, चुनिंदा शहरों में ट्रांजिट पेमेंट और लॉयल्टी कार्ड व बोर्डिंग पास को एकीकृत करने की सुविधा भी देता है। भारत में इसकी शुरुआत से कंपनी के वैश्विक विस्तार का एक बड़ा अंतर खत्म हो जाएगा।
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