संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दुनिया के नए ‘समान क्षेत्रफल वाले नक्शे’ (इक्वल एरिया मैप) के प्रस्ताव पर भारत के स्पष्ट रुख से पाकिस्तान में बौखलाहट पैदा हो गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सख्त लहजे में कहा है कि जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख सहित भारत के संपूर्ण संप्रभु क्षेत्र को केवल देश के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि भारत की सीमाओं का कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा। भारत के इस आधिकारिक बयान के तुरंत बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भारत के दावों को खारिज करने की कोशिश की है।
🔊PR No.2️⃣3️⃣8️⃣/2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣
Statement by the Spokesperson
🔗⬇️ pic.twitter.com/YV7kDWpZx6
— Ministry of Foreign Affairs – Pakistan (@ForeignOfficePk) September 7, 2026
पाकिस्तान ने फिर उठाया UNSC प्रस्ताव और जनमत संग्रह का राग
भारत के कड़े रुख पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता और राजदूत सज्जाद हैदर खान ने भारत के संप्रभुता के दावों को आधारहीन करार दिया। सज्जाद हैदर ने कहा कि भारत की एकतरफा कार्रवाई और कब्जे से जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विवादित स्थिति नहीं बदल सकती। पाकिस्तानी प्रवक्ता ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पुराने प्रस्तावों का हवाला देते हुए दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का अंतिम समाधान सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में स्वतंत्र व निष्पक्ष जनमत संग्रह द्वारा कश्मीरियों की इच्छा के अनुसार ही होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक नक्शे और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का हवाला
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक नक्शे, जो जम्मू-कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र दर्शाते हैं, वही इसकी कानूनी स्थिति का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत के एकतरफा नक्शों का इस क्षेत्र की स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह भारत के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को रुकवाए और कश्मीरी लोगों को उनके आत्मनिर्णय का अधिकार दिलाने की प्रतिबद्धता पूरी करवाए।
‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव पर भारत ने स्पष्ट किया अपना रुख
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र में ‘करेक्ट द मैप’ नाम से एक प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य दुनिया के महाद्वीपों और देशों, विशेषकर अफ्रीका के असली भू-भाग और क्षेत्रफल को सही अनुपात में दिखाना था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत ने इस ‘इक्वल एरिया मैप’ प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, लेकिन इसका मतलब किसी विशेष वैश्विक नक्शे को प्रमाणित करना या अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक सीमाओं को अंतिम रूप देना नहीं है। उन्होंने दोहराया कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर देश का रुख पूरी तरह से स्पष्ट और अटल है, जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
READ MORE: अक्टूबर से भारी पड़ेगा गाड़ी का तेल! क्रूड ऑयल की कीमतों ने कर दिया खेल

