अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की कुछ कंपनियों पर भी पड़ा है। अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार के आरोप में भारत स्थित कई कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से ईरान की अर्थव्यवस्था को अलग-थलग करने के लिए शुरू किए गए अभियान का हिस्सा है।
भारत में किन कंपनियों पर कार्रवाई?
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, कार्रवाई के दायरे में भारत की सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड, पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतिस इन्फ्रा इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इसके अलावा पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी और उसके साझेदार इंदरीसमिया अशरफमिया शेख और हरीश रामचंद्र रंगी पर भी कार्रवाई की गई है। पीपी सॉफ्टटेक के निदेशक प्रशांत गर्ग को भी अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया गया है। अमेरिकी बयान के मुताबिक शेख, रंगी और गर्ग भारतीय नागरिक हैं।
6.9 करोड़ डॉलर के ईरानी तेल का आयात
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इन कंपनियों ने ईरानी मूल के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों से जुड़े कारोबार में भूमिका निभाई। अमेरिकी दावे के मुताबिक सदाशिव ओवरसीज ने करीब 6.9 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पाद,पीपी सॉफ्टटेक ने करीब 2.5 करोड़ डॉलर के उत्पाद, प्रकृतिस इन्फ्रा पर भी करीब 2.5 करोड़ डॉलर के पेट्रोलियम उत्पादों के आयात का आरोप है। अमेरिका का कहना है कि इन कंपनियों और व्यक्तियों ने ईरान से पेट्रोलियम या पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद, बिक्री, परिवहन अथवा मार्केटिंग से जुड़े महत्वपूर्ण लेनदेन में जानबूझकर हिस्सा लिया।
अमेरिका ने सहयोगी देशों को भी दी चेतावनी
वॉशिंगटन ने सिर्फ ईरान पर ही दबाव नहीं बढ़ाया है, बल्कि दूसरे देशों को भी तेहरान के साथ आर्थिक संबंधों को लेकर चेतावनी दी है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि अमेरिका ईरानी शासन की अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने वाली संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पहले कह चुके हैं कि ईरान को आर्थिक राहत पहुंचाने वाले देशों और संस्थाओं को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
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