महाराष्ट्र(Maharashtra) में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे बने ढाबों, भोजनालयों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। इसकी वजह हाईवे पर बढ़ते हादसे और सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की चिंता है। कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों की Right of Way (ROW) यानी सड़क के लिए निर्धारित सीमा के भीतर नए ढाबे, भोजनालय या व्यावसायिक ढांचे के निर्माण और संचालन पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
निर्देशों के मुताबिक, हाईवे की ROW में मौजूद नए या पुराने अनधिकृत ढांचों को हटाने या ध्वस्त करने की कार्रवाई 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। हालांकि, किसी प्रतिष्ठान पर कार्रवाई उसकी वास्तविक स्थिति, उपलब्ध मंजूरियों और हाईवे सुरक्षा नियमों के आधार पर की जाएगी। यानी हर ढाबे को बिना जांच के हटाने के बजाय पहले यह देखा जाएगा कि वह निर्धारित सीमा और नियमों के भीतर है या नहीं।
बिना मंजूरी नहीं मिलेगा लाइसेंस
अब हाईवे के सुरक्षा क्षेत्र में आने वाली जमीन के लिए संबंधित विभाग या स्थानीय निकाय बिना NHAI या PWD की पूर्व मंजूरी के नया लाइसेंस, NOC या व्यापारिक अनुमति जारी या उसका नवीनीकरण नहीं कर सकेंगे। पहले से जारी लाइसेंस की भी समीक्षा की जाएगी।
मुंबई-नासिक से मुंबई-पुणे तक होगी जांच
महाराष्ट्र में मुंबई-नासिक, मुंबई-अहमदाबाद और पुराने मुंबई-पुणे मार्ग जैसे प्रमुख हाईवे पर बड़ी संख्या में ढाबे और ट्रक स्टॉप हैं। अब यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि इनमें से कौन-से प्रतिष्ठान हाईवे की ROW के भीतर आते हैं और किनके पास जरूरी मंजूरियां मौजूद हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को हाईवे के मध्य बिंदु से 40 मीटर के भीतर आवासीय और 75 मीटर के भीतर व्यावसायिक भूमि उपयोग में बदलाव पर रोक से जुड़े नोटिफिकेशन जारी करने को कहा है। साथ ही, हाईवे वाले जिलों में सुरक्षा टास्क फोर्स बनाकर नियमों की निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मकसद सिर्फ ढाबे हटाना नहीं
पूरे कदम का मुख्य उद्देश्य हाईवे पर अवैध निर्माण, गलत पार्किंग और सड़क किनारे होने वाली ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करना है, जो वाहनों की आवाजाही और यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फालोदी और तेलंगाना में हुए गंभीर सड़क हादसों के बाद हाईवे सुरक्षा को लेकर ये व्यापक निर्देश जारी किए हैं।