बलूच राष्ट्रवादी संगठनों ने 11 अगस्त को बलूचिस्तान(Balochistan) के ‘स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया है। इस दौरान सोशल मीडिया के जरिए बलूच, पश्तून, हिंदू, सिख, ईसाई और अन्य समुदायों को संदेश देकर बधाई दी गई। इन संगठनों का दावा है कि बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में देखा जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़े।
बलूच राष्ट्रवादी पक्ष का कहना है कि अब उनका लक्ष्य केवल स्वतंत्रता दिवस मनाना नहीं, बल्कि दुनिया से राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन हासिल करना है। कुछ समर्थक संगठनों ने भविष्य में अलग पासपोर्ट, मुद्रा, मीडिया संस्थानों और विदेशों में प्रतिनिधित्व जैसी व्यवस्थाएं शुरू करने की बात भी कही है। हालांकि, इन दावों को स्वतंत्र देश की स्थापित स्थिति नहीं माना जाता। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बलूचिस्तान अभी पाकिस्तान का हिस्सा है और ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ से जुड़े स्वतंत्रता के दावे की अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं है।
11 अगस्त की तारीख क्यों है महत्वपूर्ण ?
बलूच राष्ट्रवादी इतिहास के अनुसार, 11 अगस्त 1947 को तत्कालीन कलात राज्य ने स्वतंत्रता की घोषणा की थी। इसी घटना को आज बलूच स्वतंत्रता आंदोलन प्रतीकात्मक रूप से याद करता है। दूसरी ओर, पाकिस्तान का आधिकारिक पक्ष इस इतिहास और कलात के पाकिस्तान में शामिल होने की प्रक्रिया को अलग तरीके से प्रस्तुत करता है। कलात के पाकिस्तान में विलय की प्रक्रिया मार्च 1948 में हुई थी और इसकी परिस्थितियों को लेकर आज भी अलग-अलग ऐतिहासिक व्याख्याएं मौजूद हैं।
पाकिस्तान ने इंटरनेट सेवाओं पर लगाई रोक
बलूच पक्ष की ओर से पाकिस्तान पर आरोप है कि समारोहों के दौरान कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए गए तथा सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। ऐसे दावों के बीच सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और संदेशों को बलूच समर्थक अपनी गतिविधियों के प्रमाण के तौर पर पेश कर रहे हैं।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को बलूचिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे अलगाववादी आंदोलन और पाकिस्तान के साथ उसके राजनीतिक विवाद के संदर्भ में समझना ज्यादा उचित है।